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भागवत भगवान की वाणी और मोक्ष की कथा : वैष्णव

7 वर्ष पहले
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परमात्माने मनुष्य बनाकर भारत भूमि में जन्म दिया, यही सबसे बड़ा उपहार है। संसार में हमें हर दिन अनेक महाभारत झेलना पड़ती है। मन में प्रतिदिन नए-नए कुरुक्षेत्र के मैदान बनते बिगड़ते रहते हैं। भागवत मोक्ष की कथा है जो स्वयं भगवान की वाणी है। मोक्ष ही हमारे जीवन की मंजिल है।

यह बात पं. जनार्दन वैष्णव ने शांति नगर स्थित सीतलामाता मंदिर के पास चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में समापन पर कही। उन्होंने कहा- कलियुग में सच्चे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं। कृष्ण राजा थे और सुदामा प्रजा। राजा और प्रजा के बीच विषमता नहीं होना चाहिए। राजमहल और झोपड़ी जिस दिन एकाकार होकर आपस में गले मिल जाएंगे, उसी दिन हमारा प्रजातंत्र साकार और सार्थक हो जाएगा। संध्या को महाआरती एवं प्रसाद वितरण के पूर्व यज्ञ-हवन में भी सैकड़ों भक्तों ने विश्व कल्याण की कामना से आहुतियां समर्पित की। आयोजन समिति की ओर से शाल-श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। आभार संयोजक विष्णु चौहान ने माना।