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शिक्षकों का सच बताने के लिए शासन ने ली एनजीओ की मदद
स्कूलीशिक्षकों की स्कूल समय पर जाने, बच्चों को पढ़ाने के मामले में क्या स्थिति है यह राज्य सरकार एक गैर सरकारी संगठन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के माध्यम से हाई कोर्ट को बताएगी। ई-अटेंडेंस के मामले में शासन ने एनजीओ की इस रिपोर्ट को भी जवाब के रूप में पेश किया है। शिक्षक संघ ने शासन की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए चार दिन का समय लिया है।
हाई कोर्ट ने ई-अटेंडेंस को लेकर स्थिति साफ कर दी है। इंदौर संभाग के लिए संभागायुक्त संजय दुबे ने जो प्लान तैयार किया है उसे यथावत रखा है, जबकि बाकी प्रदेश में इसे स्वैच्छिक रखा गया है।
इंदौर संभाग के परिणामों की समीक्षा के बाद अच्छे बिंदुओं को अगले साल सरकार लागू करेगी। इस पर शिक्षक संघ ने शासन के खिलाफ अवमानना दायर कर रखी है। शिक्षकों का कहना है स्वैच्छिक होने के बावजूद कार्रवाई की जा रही है। अवमानना के मसले पर ही शासन ने जवाब दिया है।
सरकारी स्कूलों की हालत खराब
एनजीओने प्रदेश के सरकारी स्कूलों पर रिपोर्ट तैयार की है। हर जिले के कुछ स्कूलों को इसमें शामिल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों के देरी से स्कूल पहुंचने पर बच्चों को पर्याप्त समय तक शिक्षा नहीं मिलती। बच्चे ही कक्षा का समय होने पर किताबें खोलकर बैठ जाते हैं। वो क्या पढ़ रहे हैं, कैसे पढ़ रहे हैं इस पर ध्यान नहीं रहता। बच्चों से भी शिक्षकों के स्कूल आने पर बात की गई। बच्चों ने कहा- शिक्षक समय पर नहीं आते, कई बार आते हैं तो हस्ताक्षर कर लौट जाते हैं।