अपनों की स्मृति में छत्रियां
होलकर रियासत की लोकप्रिय शासिका देवी अहिल्या बाई होलकर ने इंदौर और इंदौर के बाहर अपने परिजन की स्मृति में छत्रियां बनवाने की परंपरा 1780 के दशक में अपने ससुर, पति और पुत्र की स्मृति में बनाना शुरू की थी। छत्रीबाग और कृष्णपुरा पुल के पास ये छत्रियां अपनी सुंदरता और वास्तुकला ध्यान खींचती हैं। ये छत्रियां तब खुले वातावरण और नदी किनारे बनाई गई थी।