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गाना अच्छा दिखाई भी दे तो हर्ज़ क्या है

7 वर्ष पहले
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लाइवसिंगिंग अब परफॉर्मेंस बेस्ड हो गई है। रिएलिटी शोज़ से लेकर लाइव शो तक आवाज़ और सुरों के साथ सिंगर का अपीयरेंस और उसकी परफॉर्मेंस मायने रखती है। आज से 30 साल पहले ऐसा नहीं था। कुछ लोग कहते हैं कि गाना अब सुनने की बजाय देखने की चीज़ हो गया है, लेकिन अच्छा सुनाई देने के साथ गाना अच्छा दिखे भी तो हर्ज़ क्या है।

सुबह दो घंटे रियाज़ और 1 घंटा योग

शोज़में वैसे तो गाना होता ही है, लेकिन रियाज़ की अपनी अहमियत है। मैं रोज़ सुबह दो घंटे रियाज़ करती हूं। एक घंटा योगा और 10 मिनट मेडिटेशन को देती हूं। वैसे तो म्यूज़िक अपनेआप में हीलिगं है, लेकिन योगा और मेडिटेशन काफी हेल्प करते हैं तनाव कम करने में।

ग़ुलज़ारऔर रहमान के साथ यादगार रिकॉर्डिंग

फिल्मजब तक है जान का गीत जिया रे मेरे अब तक के कॅरियर का सबसे स्पेशल सॉन्ग है क्योंकि इस रिकॉर्डिंग में गुलज़ार और रहमान सर दोनों मौजूद थे। रहमान सर के काम करने का तरीका बहुत अलग है। वे रफ ट्रैक भी रिकॉर्ड करते हैं। जो सिंगर पहली बार गाता या गुनगुनाता है। उन्हें अच्छा लगता है तो इसे वे फाइनल कट में भी रखते हैं।

INTERVIEW

रंगून गार्डन में हुए कन्सर्ट में नीति मोहन ने जिया रे, मनवा लागे जैसे खुद के नम्बर्स सुनाए।