इंदौर. प्रदेश के सरकारी, निजी मेडिकल कॉलेजों से बर्खास्त एमबीबीएस, पीजी के छात्रों की याचिका हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर ने बुधवार को खारिज कर दी। पीएमटी घोटाला उजागर होने के बाद 2008 से 2014 के बीच गलत तरीके से पास होकर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को बाहर किया गया था।
हाई कोर्ट ने लगातार 10 दिन तक इन छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बुधवार को 215 पन्नों का आदेश जारी किया। अधिकांश याचिकाकर्ता छात्र भी जबलपुर पहुंच गए थे। हाई कोर्ट ने भी माना कि जिन छात्रों को बर्खास्त किया है वह संदिग्ध हैं। एसटीएफ ने हाई कोर्ट में दिए जवाब में छात्रों के संबंध में बताया कि स्कोरर और उसके आगे-पीछे बैठे छात्रों के अंक समान हैं।
स्कोरर ने जो गलत उत्तर दिया है, वही छात्र ने भी दिया है। इसके अलावा पीएमटी फर्जीवाड़े के सरगना डॉ.जगदीश सागर, व्यापमं के पूर्व सिस्टम एनालिस्ट नितिन मोहिंद्रा से आरोपी छात्रों और उनके परिजनों के संबंध में मिली जानकारी भी याचिका खारिज होने में प्रमुख कारण रही।
बर्खास्त छात्रों के पास अब केवल सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प ही बचा है। यहां से भी राहत नहीं मिली तो अभी यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों के भविष्य का क्या होगा। दोबारा पीएमटी देने या नहीं देने के संबंध में भी अभी शासन ने कोई फैसला नहीं लिया है।
> याचिका खारिज होने का असर उन छात्रों पर भी पड़ेगा, जिन्हें अब बाहर किया जा रहा है या फिर जो अभी तक हाई कोर्ट नहीं गए हैं।
> याचिकाकर्ता छात्रों को हाई कोर्ट ने परीक्षा देने की अनुमति दी थी, लेकिन परिणाम जारी नहीं करने का निर्देश भी दिया था। यह परीक्षा स्वत: ही निरस्त हो जाएगी।