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खत्म हों डीआईजी के पद : केंद्रीय आईपीएस एसोसिएशन

7 वर्ष पहले
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मप्र आईपीएस एसोसिएशन ने दी सहमति, वेतन आयोग के फैसले का इंतजार

विशालत्रिपाठी | भोपाल

देशमें डीआईजी के सभी 177 पदों को खत्म करने की कवायद शुरू कर दी गई है। केंद्रीय आईपीएस एसोसिएशन ने इस आशय की सिफारिश की है। इसका मप्र आईपीएस एसोसिएशन ने भी समर्थन किया है। अब इसे सातवें वेतन आयोग के सामने पेश किया जाएगा। यदि आयोग ने इस सिफारिश पर मुहर लगा दी तो इस पद को खत्म कर आईजी और एसपी पद के बीच का फासला खत्म हो जाएगा।

भोपाल और इंदौर में दिसंबर 2009 में शुरू हुए एसएसपी सिस्टम को करीब ढाई साल बाद खत्म कर दिया गया था। सरकारी दस्तावेजों में एसएसपी को तो कोई आधिकारिक नाम मिला और ही अपेक्षित संसाधन। अब उसके समकक्ष माने जाने वाले डीआईजी के पद को भी खत्म करने की कवायद जोरों पर है। केंद्रीय आईपीएस एसोसिएशन ने डीआईजी के पद को एसपी और आईजी के बीच का ठहराव बताया है। तर्क है कि इस पद के लिए अलग से वेतनमान भी निर्धारित करना पड़ता है। हालांकि, इसे लेकर सातवें वेतन आयोग का फैसला आना अभी बाकी है। मप्र आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मैथलीशरण गुप्त के मुताबिक इस सिफारिश पर एसोसिएशन ने अपनी सहमति जताई है।

16 वर्ष कर दें एसपी का कार्यकाल:

जानकारोंके मुताबिक 14 साल की नौकरी के बाद किसी भी पुलिस अफसर को डीआईजी बनाया जाता है। आईजी के लिए 18 साल की नौकरी अनिवार्य रहती है। एक मौजूदा डीआईजी ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि एसपी का कार्यकाल दो वर्ष बढ़ाकर 16 साल तक कर देना चाहिए। इससे एसपी को दो साल की वरिष्ठता मिल जाएगी। इसके बाद उक्त एसपी को प्रमोट कर आईजी बना दिया जाना चाहिए। दूसरे विभागों में भी एसपी और आईजी स्तर के अफसर के बीच कोई वेतनमान नहीं है।

मप्रमें हैं डीआईजी के 22 पद

नेशनलक्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार मप्र में 15 रेंज डीआईजी के पद हैं, वहीं पुलिस मुख्यालय में डीआईजी के सात पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा देश में डीआईजी के कुल 177 पद स्वीकृत हैं।