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प्रत्यंचा चढ़ाते ही चारों ओर बिजली चमकने लगी

6 वर्ष पहले
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इंदौर| सारीखेती सूख जाने के बाद वर्षा किसी काम की नहीं होती, उसी प्रकार मनुष्य का समय निकल जाने के बाद उसका जीवन सूखी खेती के समान होता है। ये विचार नारायण शास्त्री ने मूसाखेड़ी में चल रही रामकथा के चौथे दिन बुधवार को व्यक्त किए। उन्होंने कथा के दौरान सीताजी के स्वयंवर का वर्णन करते हुए कहा- रामचंद्रजी ने गुरु को प्रणाम किया, धनुष की ओर बढ़े। धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाई। प्रत्यंचा चढ़ाते ही चारों ओर बिजली चमकने लगी। वर्षा होने लगी। धरती डोलने लगी। तब सभी ने प्रभु राम को प्रणाम किया और चारों और जय श्रीराम के गुणगान होने लगे। इसके बाद भगवान राम का सीताजी के साथ विवाह हुआ। कथा पंडाल में भी राम विवाह का उल्लास चारों ओर था। संयोजक उमेश मंगरोला ने बताया व्यासपीठ का पूजन रामेश्वर दयाल समस्त कार्यकर्ताओं ने किया।