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प्रमुख सचिव ने बैठक में भ्रष्ट कहा, कोर्ट में लगाई याचिका

6 वर्ष पहले
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लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निलंबित कार्यपालन यंत्री चैतन्य रघुवंशी को हाई कोर्ट ने बहाल कर दिया है। रघुवंशी ने विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। रघुवंशी की अन्य मांगों पर याचिका की अंतिम सुनवाई में विचार किया जाएगा। बीते दिसंबर में विभाग के प्रमुख सचिव ने एक बैठक ली थी। इसमें अधिकारियों को फटकारते हुए उन पर लेनदेन करने का कथित आरोप लगाया था। इस पर कार्यपालन यंत्री ने आपत्ति ली थी। कहा था कि इस तरह सभी पर आरोप लगाना गलत है। साबित किया जाए कि कौन भ्रष्ट है। कार्यपालन यंत्री की इस हरकत के बाद उसे कुछ कारण बताकर सस्पेंड कर दिया गया था।

कार्यपालन यंत्री ने प्रमुख सचिव की बैठक में कही गई टिप्पणी और खुद को निलंबित किए जाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने प्रमुख सचिव अश्विनी राय और चीफ इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। याचिका में उल्लेख किया है कि उन्हें निलंबित करने का भी ठोस कारण नहीं दिया गया है, जबकि वे खुद हाई कोर्ट में विचाराधीन पांच मामलों में विभाग की तरफ से प्रभारी अधिकारी हैं। बैठक के दौरान व्यक्ति विशेष पर आक्षेप लगाने के बजाय सभी पर प्रमुख सचिव ने टिप्पणी की थी।

भोपालमें हुई थी बैठक

दिसंबरके अंत में भोपाल में प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी कार्यपालन यंत्रियों और अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इसमें काम की समीक्षा, काम में देरी, गुणवत्ता पर बात हो रही थी। प्रमुख सचिव ने योजनाओं के पूरा होने की सुस्त चाल पर फटकार लगाना शुरू की थी। उन्होंने अधिकारियों पर गड़बड़ी करने की टिप्पणी की थी। इस पर रघुवंशी ने मीटिंग में ही खड़े होकर आपत्ति दर्ज कराई थी।