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एमआर-4, एमआर-11 को बनाने की मंजूरी

7 वर्ष पहले
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फंडिंग के लिए बनेगी एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी

लाइट मेट्रो ट्रेन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार, जानिए कहां और कैसे दौडे़गी शहर में

4 रूट, 85 किमी ट्रैक, 190 लाइट मेट्रो

साढ़ेतीन महीने बाद आईडीए बोर्ड की बैठक सोमवार को हुई। इसमें कई अहम फैसले लिए गए। मास्टर प्लान में प्रस्तावित दो मेजर रोड बनाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। पहली सड़क एमआर-4 है, जो रेलवे स्टेशन से लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन तक बनेगा। इससे दो बस स्टैंड (सरवटे और कुमेड़ी में प्रस्तावित आईएसबीटी) तीन रेलवे स्टेशन (मास्टर प्लान में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन भी) जुड़ जाएंगे। दूसरी सड़क एमआर-11 है। इसका पहला हिस्सा (एमआर-2 से चंद्रगुप्त चौराहे तक) सिंहस्थ मद से और दूसरा (बायपास से एबी रोड तक) बेटरमेंट चार्ज (विकास शुल्क) लेकर बनाया जाएगा। भास्कर ने एक दिन पहले ही इसका खुलासा किया था।

आईडीए चेयरमैन शंकर लालवानी ने बताया स्कीम 114 पार्ट-1 में एमआर-11 के लिए सवा दो एकड़ जमीन का जो मुआवजा श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने मांगा था, उसे देने से बोर्ड ने मना कर दिया है। इस मामले में यह तथ्य सामने आया कि आंतरिक विकास जमीन जमीन मालिक को करना था, जो उसने नहीं किया। यह काम आईडीए काे करना पड़ा। संचालक विजय मालानी ने इसे मुद्दे पर तर्क रखा तो अफसर भी जवाब नहीं दे पाए। एक महत्वपूर्ण निर्णय कुमेड़ी में प्रस्तावित आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) को लेकर लिया गया। सिंहस्थ मद से मिली राशि से प्राधिकरण सिंहस्थ से पहले वहां मुख्य टर्मिनल का शेड, आवश्यक सुविधाएं और बुकिंग काउंटर बनाएगा। बाद में पीपीपी मॉडल पर विकास किया जाएगा।

मेट्रो की डीपीआर बना रही रोहित एसोसिएट्स के मुताबिक।

ऐसे काम करेगी यह कंपनी

प्रदेशमें फिलहाल इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है जो शहरों में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड की व्यवस्था कर सके। भोपाल और इंदौर में ही शुरुआत में लाइट मेट्रो के लिए 23 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। इतनी राशि का कर्ज कोई भी नगरीय निकाय नहीं ले सकता है। इसके साथ ही सरकार के पास भी इतना फंड नहीं है कि वह निकायों में बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड उपलब्ध करा सके। ऐेसे में सरकार पीडब्ल्यूडी की विंग एमपीआरडीसी की तर्ज पर नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत एमपीयूडीसी कंपनी का गठन कर रही है।

इन पर भी

हुआ निर्णय