इंदौर. 16 साल की उम्र में बेटी की शादी कर दी। अब वह मां बनने वाली है। ससुराल वाले बहू की सोनोग्राफी कराने पहुंचे तो उम्र 17 साल होने की जानकारी ऑनलाइन सिस्टम माध्यम से प्रशासन तक पहुंच गई। प्रशासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच में बाल
विवाह की पुष्टि हुई तो विभाग की शिकायत पर पुलिस ने लड़की के पिता पर केस दर्ज किया है।
देपालपुर पुलिस के अनुसार 2013 में लालचंद्र ने बेटी की शादी मनोज के साथ की थी। मनोज के परिवार के सदस्य बहू को लेकर शहर के एक सोनोग्राफी सेंटर पर पहुंचे थे। जहां परिवार ने उसकी उम्र 17 वर्ष लिखवाई। इसके बाद लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच पड़ताल कर केस दर्ज करने का आवेदन दिया था। लालचंद्र के खिलाफ बेटी का बाल विवाह करने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत केस दर्ज किया है। इस धारा में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है।
प्रशासन ने कराई थी जांच
प्रशासनने भ्रूण लिंग परीक्षण रोकने के लिए जिले के सभी सोनोग्राफी सेंटर को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा है। इसे लाडली एक्टिव डिवाइस नाम दिया गया है। इसमें सोनोग्राफी सेंटर पर होने वाली हर जांच को रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें यह पता चल जाता है कि सोनोलॉजिस्ट क्या जांच कर रहा है।
यही नहीं सोनोग्राफी सेंटर पर हर जांच से जुड़े दस्तावेज रखना अनिवार्य है। गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी जांच के मामले में उनकी फोटो आईडी लिया जाता है। इन सभी की ऑनलाइन मॉनीटरिंग के लिए कलेक्टोरेट में कंट्रोल रूम स्थापित है। देपालपुर नाबालिग की शादी का मामला भी इसी सिस्टम की वजह से पकड़ाया है। इसी सिस्टम के तहत सामने आई जानकारी के आधार नाबालिग के विवाह के कुछ अन्य मामलों की भी जांच चल रही है।