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विरोध दरकिनार, सीबीएसई ही लेगा नेट

7 वर्ष पहले
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इंदौर से हर साल छह हजार देते हैं टेस्ट

सहायकप्राध्यापक की पात्रता के लिए यह परीक्षा आयोजित की जाती है। नेट पास करने वाले परीक्षार्थी सीधे सहायक प्राध्यापक बनते हैं। इतना ही नहीं तय मापदंड से अधिक अंक लाने वाले परीक्षार्थी जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फैलोशिप) के लिए भी पात्र होते हैं। इसके लिए यूजीसी की तरफ से स्कॉलरशिप दी जाती है। नेट में इंदौर से ही हर बार छह हजार से ज्यादा प्रतिभागी शामिल होते हैं।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

सहायकप्राध्यापक की पात्रता के लिए होने वाली नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) अब यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) आयोजित नहीं करेगा। इसका जिम्मा यूजीसी ने सीबीएसई को सौंप दिया है। दिसंबर में होने वाली नेट अब सीबीएसई ही आयोजित करेगा। काम के ज्यादा बोझ और सेंटर तय करने में यूजीसी को रही परेशानी के चलते यह निर्णय लिया गया है। हालांकि नेट के पैटर्न औैर सिलेबस में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सीबीएसई ने नेट के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी है। मध्यप्रदेश में यह परीक्षा इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में होगी। हालांकि यूजीसी इस पर जून में ही सैद्धांतिक फैसला ले चुका था, लेकिन तब इसका विरोध शुरू हो गया था। कई सवाल उठाए गए थे, जिसका समाधान कर यूजीसी ने इस पर अंतिम निर्णय ले लिया और इसी के बाद सीबीएसई ने भी तैयारी आरंभ कर दी।

इसलिएसीबीएसई को सौंपा परीक्षा का जिम्मा

यूजीसीद्वारा इस परीक्षा का जिम्मा सीबीएसई को ही सौंपे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि पूरे देश में सबसे बड़ा नेटवर्क सीबीएसई के पास है। सीबीएसई हर साल इसी नेटवर्क के बूते देशभर में अपनी 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा आयोजित करता है। यही वजह है कि जून में यूजीसी ने नेट परीक्षा किसी और संस्था के जरिए करवाने का निर्णय लिया था, लेकिन कई एजेंसियों पर विचार के बाद सीबीएसई को यह परीक्षा सौंपी गई।

प्रक्रियाआरंभ हो गई है

^यूजीसीने नेट परीक्षा का जिम्मा सीबीएसई को सौंपा है। यह कई मायनों में महत्वपूर्ण है। अब इसी साल होने वाली नेट की अगली परीक्षा सीबीएसई ही आयोजित करेगी। -डॉ. मंगल मिश्रा, सदस्यनेक पियर टीम