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मांग पर निर्भर चावल का भविष्य

7 वर्ष पहले
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इंदौर| धान1509 धान में पिछले कुछ दिनों से निर्यात मांग लगातार चल रही थी, वह अब कुछ रुकी है। इसका भाव जो पिछले दिनों 3500 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल तक चला गया था।

वह अब 3000 रुपए प्रति क्विंटल के अासपास तक सिमट गया है। अगर निर्यात मांग निकलती है तो भाव बढ़ने में भी देर नहीं लगेगी। हरियाणा के राइस मिलर प्रदीप गर्ग और संचालक अरविंद गोयल ने बताया कि 1121 धान 15 से 20 अक्टूबर तक आएगी। ट्रेडिशनल बासमती की फसल नवंबर तक आने की संभावना है। इस बार दाेनों धान का रकबा बढ़ने से अच्छी फसल आने की उम्मीद से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि पुराने और नए बासमती के भाव में काफी अंतर रहेगा, लेकिन यह उम्मीद तब ही कायम रह सकती है जबकि निर्यात मांग कम हो। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने और पिछले साल के मुकाबले इस साल भाव कम खुलने से निर्यात मांग बढ़ सकती है। मोटे चावल की खुले बाजार में मांग काफी कम है। पुराना स्टॉक व्यापारियों के पास काफी है। साथ ही इसकी फसल भी काफी अच्छी होने से भाव में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।