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जो इंदौर में सीखा वह मुंबई में काम रहा है

7 वर्ष पहले
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मैंनेइंदौर की नाट्य संस्थाएं इंदौर थिएटर और प्रयोग में बरसों रंगकर्म किया।कई नाटकों में अभिनय किया। यहां थिएटर में जो काम किया, जो सीखा, वह आज मुझे मुंबई में काम रहा है। यह कहना है कुछ टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में अभिनय कर चुके पृथ्वी सांखला का। वे निजी यात्रा पर इंदौर आए हैं। इस मौके पर सिटी भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।

इंदौरमें 17 सालों तक किया रंगकर्म

उन्होंनेकहा कि कई बरसों तक अभिनय करने बाद मुझे बड़ा ब्रेक सोनी टीवी के धारावाहिक बड़े अच्छे लगते हैं में मिला। मैंने इस धारावाहिक में साक्षी तंवर के पिता की भू्मिका निभाई थी। इसके अलावा बीबीसी की डॉक्युमेंट्री फिल्म बुद्धा में काम किया। इसमें मैंने बुद्ध के सारथी चाना का रोल किया था। लेकिन इसके पहले इंदौर में मैंने 17 सालों तक रंगकर्म किया।

तीनफिल्मों में किए महत्वपूर्ण रोल

उन्होंने कहा कि मैंने तीन फिल्मों में भी काम किया। मेरी पहली फिल्म थी- \\\"कहां हो तुम।\\\' इसे एफटीआईआई पुणे के गोल्ड मेडलिस्ट फिल्मकार विजय कुमार ने डायरेक्ट किया था। इसमें मैंने शरमन जोशी और सोनू सूद जैसे कलाकारों के साथ किया। सोनू सूद को इस फिल्म में मेरा काम इतना पसंद आया कि उन्होंने मुझे फिल्म शहीद-ए-आज़म फिल्म के लिए रिकमंड किया। मैंने इसमें गांधी भूमिका की। इसके अलावा मैंने एक ऑफ बीट सिनेमा की फिल्म शोभायात्रा में गांधी का रोल किया जो असल में बिजनेमैन होता है और उसके अंडरवर्ल्ड से रिश्ते होते हैं। यह लंबे समय तक सेंसर बोर्ड में अटकी रही और बाद में र्बलिन फिल्म फेस्टिवल, एशियन फिल्म फेस्टिवल और मामी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी।

पृथ्वी सांखला

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