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संतूर वादन के साथ समझाई शास्त्रीय संगीत की खूबियां

7 वर्ष पहले
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डॉ.दैठणकर ने राग परमेश्वरी पेश किया। एक मीठे आलाप को उन्होंने सरल तरीके से बजाया। इसमें उन्होंने जोड़ और झाला से वादन निखारा। फिर उन्होंने झपताल, एकताल और तीन ताल में तीन बंदिशें पेश की। उनके वादन में सरसता थी और इत्मीनान भी था। अपने इस प्रभावी वादन के बीच ही उन्होंने संतूर वादन की अलग-अलग टेक्निक के बारे में जानकारी भी दी और राग के विस्तार को समझाया है।

मेडिटेटिवऔर स्पिरिचुअल खूबियां बताईं

डॉ.दैठणकर ने वादन के दौरान ही स्टूडेंट्स को क्लासिकल म्यूजि़क के मेडिटेटिव और स्पिरिचुअल ऑस्पेक्ट्स और कई खूबियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि स्टूडेट्स आंखें बंद कर संतूर के नोट्स को गहराई से महसूस कर सकते हैं। उनके साथ उल्हास राजहंस ने तबले पर मीठी संगत की।

music programme

मंगलवार को ईएमआरसी में डॉ. धनंजय दैठणकर ने संतूर वादन पेश किया।