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कलेक्टर ने अफसरों से कहा- बाबू मनमानी करंे और आपको पता नहीं
लोकायुक्तछापे के बाद कलेक्टर ने अधिकारियों को आदेश दिए कि एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्यालयों में एक ही जगह तीन साल से जमे रीडर, बाबुओं को बदल दो। इनकी सूची बनाओ और जिले में अन्य जगह पदस्थ किया करो। कलेक्टोरेट में हुई राजस्व अधिकारियों की बैठक में कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने अधिकारियों को चेताया कि इस तरह की स्थिति ठीक नहीं है कि बाहर बाबू मनमानी करें और अधिकारियों को पता ही नहीं चले। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की जरूरत है। अपने दफ्तर में हो रहे काम पर नजर रखें और व्यवस्था चुस्त बनाएं। कोई रीडर, बाबू कैसे आम व्यक्ति से यह कह सकता है कि मैं अधिकारी से काम करा दूंगा, यह गंभीर स्थिति है।
कलेक्टर ने एसडीएम कार्यालय में व्यवस्था सुधारने के लिए अधिकारियों से कहा कि वह ई-गवर्नेंस के जरिए योग्य कम्प्यूटर ऑपरेटर रखें और उन्हें कुछ समय में बदलते रहें। योग्य लोगों को कार्यालय में रखें और नियमित कर्मचारियों को ही जरूरी फाइल काम दें। बैठक में हर एसडीएम को एक-एक ऑपरेटर रखने की भी मंजूरी दे दी गई।
अब जमीन विवाद में
3. लोकायुक्त ने प्लॉट पर कब्जे के मामले में एसडीए कोर्ट में चलने वाले धारा 145 के प्रकरण में चपरासी को पांच हजार रुपए लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा। इस मामले में रीडर को भी आरोपी बनाया।
जाति प्रमाणपत्र के लिए
2. करीब एक साल पहले लोकायुक्त ने समाधान केंद्र में छापा मारकर अनोखेलाल सोनी को पकड़ा था। उसने 17 साल के किशोर से उसके भाई-बहन के जाति प्रमाणपत्र देने के लिए रिश्वत मांगी थी। किशोर ने खुद ही शिकायत की थी।
छात्रवृत्ति जारी करने के लिए
1. करीब दो साल पहले आदिम जाति विभाग का बाबू नरेंद्र भोर एक 19 साल के छात्र की शिकायत पर रंगेहाथों पकड़ा गया। उसने छात्रवृत्ति जारी करने के एवज में छात्र से रिश्वत मांगी थी। छात्र ने इसकी शिकायत सीधे लोकायुक्त पुलिस को कर दी थी।
दो साल में लोकायुक्त पुलिस की कलेक्टोरेट में तीसरी कार्रवाई
यह भी हुए फैसले
{जिलेमें कृषि तथा अन्य जमीनों का सीमांकन अब टीएसएम मशीनों से किया जाएगा।
{डायवर्ट की गई भूमि का नामांतरण अब तहसीलदार और नायब तहसीलदार कर सकेंगे।
{कृषि से भिन्न प्रयोजन के लिए यदि जमीन का उपयोग पाया जाएगा तो डायवर्शन शुल्क वसूला जाएगा।