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बंगले ने संकट में डाली एमजीएम की मान्यता

7 वर्ष पहले
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एमजीएममेडिकल कॉलेज परिसर में अस्पताल अधीक्षक का बंगला हाई कोर्ट को आवंटित होने के बाद उसमें बगैर अनुमति बाउंड्रीवॉल बनाने नए निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन ने कमिश्नर को पत्र लिखकर आपत्ति ली है। नियमों के अनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन इस जमीन पर सरकार की अनुमति के बिना निर्माण नहीं किया जा सकता। वहीं संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एसएस कुशवाह ने कहा है कि यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मापदंडों के खिलाफ है और कॉलेज की मान्यता संबंधी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। हम आवंटन निरस्त करने के लिए पत्र लिखेंगे।

शेष-पेज 6 पर

तीनसाल के लिए आवंटन दिया है

आवंटन के आदेश में कमिश्नर ने अधिपत्य की सूचना डीन को दिए जाने की शर्त रखी थी लेकिन डीन के अनुसार उन्हें अभी तक नवीन निर्माण अधिपत्य की कोई अधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। हाई कोर्ट इंदौर बेंच के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार एजे खान और डिप्टी रजिस्ट्रार बीके द्विवेदी से इस संबंध में संपर्क किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई।



बंगला रहने के लिए दिया है

- यह बंगला रहने के लिए दिया गया है। हमें उसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आसपास की जमीन पर कब्जा करने के लिए नहीं दिया गया है। प्रावधान के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसकी सूचना कमिश्नर को भी दी गई है।

डॉ. एम.के. राठौर, डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज

यह है नियम

मेडिकलकाउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन कहती है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में डीन, अस्पताल अधीक्षक एवं नर्सिंग अधीक्षक का निवास उसी परिसर में होना चाहिए।

येहै मामला

हालही में कमिश्नर ने एमवायएच अधीक्षक का आवास हाई कोर्ट को आवंटित कर दिया था। आवंटन के बाद बिना डीन को सूचित किए नया निर्माण शुरू कर दिया गया। डीन ने संभागायुक्त को लिखे पत्र में कहा है पेड़ों को काटकर 300 फीट बाउंड्री वाल भी तोड़ दी गई है। पत्र में डीन बंगले के लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण रोके जाने की मांग की गई है। चूंकि एमसीआई के रिकॉर्ड में कॉलेज द्वारा इन बंगलों को डीन अधीक्षक के नाम होना बताया गया है। निरीक्षण के दौरान यदि जानकारी गलत पाई जाती है तो मान्यता संबंधी समस्या हो सकती है।