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between the lines

7 वर्ष पहले
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between the lines

कितने समय तक चलेगा एकला चलो का अंदाज

कैलाश शर्मा को जब से इंदौर भाजपा की कमान मिली है, तब से उनकी दुश्मनी ही बढ़ी है, जो पहले से नाराज थे वो तो अपनी जगह हैं ही। शर्मा को महाजन के अलावा किसी ठौर से तारीफ नहीं मिल रही है बल्कि तीखी बयानबाजी चाहे जब और चाहे जिसकी झेलनी पड़ जाती है। शहर के विधायकों का ही हिसाब लगा लें तो समझ जाता है कि शर्मा के लिए राह कितनी मुश्किल है। टीम तक चुन पाने के लिए उन्हें चाहे जब उलाहने सुनने पड़ते हैं, लेकिन इतने सिपहसालार भी तो साथ कि उन्हें पद दिए जाएं और वो विधायकों की पसंद वालों से पार पा सकें। सबसे बड़ी नाराजी दो नंबरी नेताओं की है जो उनके अध्यक्ष बनने पर ही ज्यादा उत्साहित नहीं थे और पद संभालने के बाद से शर्मा की निगाहें बदली तो खाइयां और बढ़ गईं। कमाल तो यह भी है कि दुश्मन के दुश्मन भी इस मामले में दोस्ती नहीं निभा रहे हैं वरना उषा ठाकुर यदि मेंदोला के कोटे से शर्मा से नाराज हों तो सुदर्शन गुप्ता को उनके साथ नजर आना चाहिए था जो कि हो नहीं रहा है। यानी इन दिनों शर्माजी एकला चलो रे के अंदाज में भाजपा संभाल रहे हैं। {खबरची