नाहरछाजाफलिया से उदयगढ़ जाने के लिए रोड तक पहुंचना काफी मुश्किल था। उबड़-खाबड़ रास्ता बीच बीच में नाले। ऐसे में जैसे तैसे रेस्क्यू दल वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से ट्रैक्टर का इंतजाम किया। तेंदुए वाले पिंजरे को ट्रैक्टर में रखकर 4 किमी का सफर किया। रोड से ट्रक में पिंजरे को डालकर इंदौर के लिए रवाना किया गया।
पगमार्क के पास थे पंजे से खरोंच के निशान
शूटरशेरसिंह कटारे ने भास्कर को बताया सर्चिंग के दौरान नाहरछाजा फलिए में तेंदुए के पगमार्क के पास पंजे के खरोंच के निशान थे। इससे स्पष्ट हो गया कि यह तेंदुए का क्षेत्र है और वह यहीं का रहने वाला है। तेंदुए ने यहां गंध भी छोड़ी थी। कटारे ने बताया तेंदुए का क्षेत्र 25 किमी का होता है। वह यह सब इसलिए करता है ताकि कोई दूसरे तेंदुए इस क्षेत्र में सके। इसकी उम्र छह से सात साल की है। पकड़ाने के बाद तेंदुआ हिंसक हो गया था। उसने प्लाय को काट दिया। अगर उसकी गर्दन बाहर जाती तो उसे पकड़ना मुश्किल हो जाता।
सप्ताहभर पूर्व एक गर्भवती महिला बालिका की तेंदुए के हमले में मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश था। उन्होंने चक्काजाम कर तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की थी। 12 सितंबर से वन विभाग जोबट के रेंजर डी.एस.मेड़ा, भाबरा रेंजर श्रीराम राठौर, उदयगढ़ के डिप्टी रेंजर पी.सी.मकवाना, एसडीओ रमेशचंद्र राठौर, वन पाल आर.एस.तिवारी, एस.एल.भूरिया, वन रक्षक सरफराज मकरानी, मोहब्बत सिंह बघेल, गणपतसिंह नायक, खलील खान इंदौर से आए दो शूटर शेरसिंह कटारे सोहनलाल दसोरिया पूरी टीम के साथ दिन रात तेंदुए की सर्चिंग में लगे हुए थे। डीएफओ आर.एस.सिकरवार ने बताया तेंदुए पकड़ने वाली टीम को इनाम दिलवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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