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बोहरा समाजः नमाज बिना नेकी कबूल नहीं होती

धर्मगुरु डॉ. सैयदना साहब के उत्तराधिकारी आलीकदर सैयदी मुफद्दल भाई साहब सैफुद्दीन मौला ने सैफीनगर मसजिद में वाअज फरमाई।

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2012, 05:00 AM IST
Without prayer there is good and acceptable Smajः
इंदौर. बोहरा समाज के लिए शनिवार का दिन खास रहा। वह इसलिए क्योंकि योमूल मबास (शबे मेअराज) के मुबारक दिन उन्होंने धर्मगुरु डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब (त.उ.श.) के उत्तराधिकारी आलीकदर सैयदी मुफद्दल भाई साहब मौला की वाअज सुनी। इसके लिए सैफीनगर मसजिद में हजारों लोग शामिल हुए। सुबह 8 बजे से ही मसजिद में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मसजिद परिसर के बाहर, गार्डन में और जिसे जहां जगह मिली बैठ गए। सुबह 9.30 बजे आलीकदर सैयदी मुफद्दल भाई साहब मौला मसजिद में तशरीफ लाए। जैसे ही वे आए लोगों ने हाथ जोड़े और मौला-मौला कहकर दीदार किए। उन्होंने वाअज में कहा हमेशा नमाज पाबंदी से अदा करो। नमाज बिना कोई नेकी कबूल नहीं होती है। कुरआन शरीफ की तिलावत से हमें खुदा की रहमत व बरकत अता होती है। शरीयत इस्लाम की पाबंदी करो। योमूल मबास का दिन मुबारक दिन है। इस दिन पैगंबर-ए-इस्लाम ने इस्लाम का दिन व ईमान की नैमत हमें अता फरमाई है। शुरुआत में कुरान शरीफ की आयतों व कशीदा मुबारक की तिलावत की गई। इंदौर आकर बहुत खुशी हुई- मौला ने कहा मालवा शहर अमन के लिए पहचाना जाता है। मुझे इंदौर आकर बहुत खुशी हुई। ट्रेन की जगह विशेष विमान से गए मुंबई- मौला इंदौर से मुंबई अवंतिका एक्सप्रेस से जाने वाले थे। ट्रेन के रवाना होने के समय हजारों लोग स्टेशन पहुंच गए। हालांकि कार्यक्रम परिवर्तित हो गया। वे शाम 4.30 बजे विशेष विमान से मुंबई के लिए रवाना हुए। मुझे मौला के दीदार करने दो वाअज शुरू होने के बाद मसजिद के एक ओर का गेट बंद कर दिया गया था। गेट के बाहर बड़ी संख्या में खड़ी महिलाओं ने गेट खोलने के लिए कहा। जब उन्होंने दूसरे गेट से आने के लिए कहा तो महिलाओं ने कहा- हमें मौला के एक बार दीदार करने दो। उनके इस आग्रह के बाद उन्हें दूसरी जगह से अंदर करवाया गया।
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