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न फैशन शो, न सगाई समारोह और न नेताजी का स्वागत, अब सिर्फ बस दौड़ेगी

8 वर्ष पहले
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इंदौर। बीआरटीएस पर पिछले पखवाड़े में हुए फैशन शो, सगाई समारोह और नेताजी के स्वागत मंच के बाद प्रशासन ने सख्ती करने के निर्देश दिए हैं। धारा 144 के तहत बीआरटीएस पर न तो कोई आयोजन होगा और न ही इसकी अनुमति मिलेगी, जिससे यहां का यातायात बाधित न हो।

यह निर्णय बुधवार को बीआरटीएस की समीक्षा बैठक में हुआ। कलेक्टर आकाश त्रिपाठी व डीआईजी राकेश गुप्ता की मौजूदगी में तय हुआ कि बीआरटीएस पर अब किसी भी तरह के आयोजन, जुलूस, मंच लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां तैनात ट्रैफिक वार्डनों के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी का दर्जा दिया जाएगा।

10 मई से सभी वार्डन निर्धारित यूनिफॉर्म में होंगे। सभी बस स्टॉप व कॉरिडोर की नियमित सफाई के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में आरटीओ को बाहरी बसों को सही तरीके से चलाने के लिए कहा गया है। साथ ही वीडियोकोच बसों का शहर में प्रवेश रोकने के लिए भी सख्ती के लिए कहा गया। 10 मई से शुरू होने वाले ट्रायल रन के लिए पुलिस, ट्रैफिक विभाग और एआईसीटीएसएल में समन्वय पर भी चर्चा हुई।

पार्षद बोलीं कुछ कहना जल्दबाजी- बुधवार को महापौर कृष्णमुरारी मोघे के साथ कुछ एमआईसी सदस्यों व पार्षदों ने आई बस से कॉरिडोर देखा। महापौर ने इस सिस्टम को सराहा और कहा- जो कमियां थीं, वे भी अब खत्म हो गई हैं। सुधार अभी भी जारी है। एमआईसी सदस्य सपना चौहान व स्वाति शर्मा ने भी इसे अच्छा बताया, वहीं पार्षद रूबिना खान ने कहा- अभी इसके सफल-असफल पर निर्णय नहीं ले सकते।

लोगों को ट्रैफिक के बीच चढऩे-उतरने में परेशानी आएगी। इसका निदान करें, भले ही ओवरब्रिज बनाए जाएं। हालांकि पार्षदों में सुनील पाटीदार, चिंटू चौकसे, सुधीर देडग़े, एल्डरमैन गणेश गोयल व दो पार्षद पति ही थे। निगम अपर आयुक्त मनोज पुष्प, सुरेंद्र कथूरिया, सचिव और अन्य अधिकारी भी थे।

सिख समाज, लोहा व्यापारी और छात्र भी घूमे

एआईसीटीएसएल के सीईओ संदीप सोनी के मुताबिक सुबह नौलखा स्थित एक निजी इंस्टिट्यूट के छात्रों ने कॉरिडोर देखा तो बाद में सिख समाज, लोहा व्यापारी एसोसिएशन के पदाधिकारी व अन्य संगठनों ने भी बस से इसका भ्रमण किया। सभी ने बस, बस स्टॉप और कॉरिडोर में लगने वाले कम समय की सराहना की तो सिग्नल सहित अन्य सिस्टम जल्द लगाने का सुझाव भी दिया।

एआईसीटीएसएल के गठन पर सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने एआईसीटीएसएल के गठन पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक कंपनी की स्थापना 1 दिसंबर 2005 को हुई। बाद में पता बदला और कई खामियां भी आईं। कंपनी के मुताबिक इसकी साधारण सभा होना चाहिए, जो नहीं की गई।

आंकड़े और तारीख वार जानकारी देते हुए कोडवानी ने कहा- कंपनी की बैलेंस शीट भी चेक नहीं हुई, न ही रिटर्न दाखिल किए गए। इसमें शासन के शेयर नहीं हैं, ऐसे में शासकीय कंपनी कैसे बन गई? जो शेयर होल्डर बताए हैं, उनके पेन नंबर हैं, यानी कंपनी शासन की नहीं इन लोगों की है।

जनहित याचिका की सुनवाई 14 को

बीआरटीएस प्रोजेक्ट को लेकर 14 मई को होने वाली जनहित याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ में जस्टिस एन.के. मोदी एवं जस्टिस एम.सी. गर्ग की नई बेंच करेगी। पिछली सुनवाई में अदालत ने बीआरटीएस पर ट्रायल रन की अनुमति दे दी। याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी ने आवेदन लगाया था कि ट्रायल रन की अनुमति के ऑर्डर पर पुनर्विचार किया जाए, क्योंकि प्रोजेक्ट में कई खामियां हैं।

जस्टिस शांतनु केमकर एवं जस्टिस एमसी गर्ग की डिवीजन बेंच में इसी आवेदन की सुनवाई में अदालत ने मंशा जताई थी कि इस आवेदन की सुनवाई भी 14 मई को निर्धारित सुनवाई में कर ली जाएगी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है। इस पर जस्टिस केमकर ने याचिका से अपने को अलग कर अन्य बेंच में सुनने का ऑर्डर किया। यद्यपि याचिका कौन सी बेंच सुनेगी यह मप्र हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तय करते हैं, किंतु इस बार रोस्टर में उल्लेख है कि यदि किसी न्यायाधिपति को किसी याचिका को नहीं सुनना हो तो दूसरी रेगुलर बेंच उसे सुनेगी।