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नन्हें तेंदुए को शिकार की ट्रेनिंग देकर छोड़ेंगे

7 वर्ष पहले
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इंदौर. हाल ही में चिडिय़ाघर में देवास के एक गांव से लाए गए नन्हे तेंदुए ने बुधवार को गुनगुनी धूप का आनंद लिया। करीब दो घंटे तक वह चिडिय़ाघर के गार्डन में मस्ती करता रहा। इतने दिनों तक उसे इसलिए अस्पताल के कमरे में रखा गया, ताकि वह ठंड से बीमार न हो जाए। अब चिडिय़ाघर प्रबंधन ने तय किया है कि यदि नन्हें तेंदुए को जंगल में दोबारा छोडऩा पड़ा तो उससे पहले उसे शिकार की ट्रेनिंग देंगे, ताकि वह जंगल में भूखा न रहे। उसे खरगोश, चूहे या अन्य जानवरों का शिकार करना सिखाया जाएगा।
चिडिय़ाघर प्रभारी अधिकारी डॉ. उत्तम यादव ने इसकी पुष्टि की। गौरतलब है कि नन्हा तेंदुआ पिछले दिनों देवास के जंगल से भटकते हुए बकरियों के झुंड के साथ गांव पहुंच गया था। गांव वालों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने उसे चिडिय़ाघर पहुंचाया था। हालांकि गांव के लोगों ने जानकारी दी थी कि उसके साथ एक बच्चा और था लेकिन वह तभी मादा टाइगर के साथ दोबारा जंगल में चला गया था।
जू में ही रहेगा खूंखार तेंदुआ : जू ने लिखा सीसीएफ को पत्र
इधर, चिडिय़ाघर प्रबंधन ने सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) को पत्र लिखकर कहा है कि करीब एक माह पहले धार के जंगल से पकड़कर लाए गए नरभक्षी तेंदुए को भी यहीं रहने दिया जाए। अगर उसे जंगल में दोबारा छोड़ा गया तो खतरे से खाली नहीं होगा। पत्र में लिखा गया है कि वन विभाग तेंदुए को यहीं रखने की अनुमति दें ताकि व्यवस्थित तरीके से उसके लिए सुविधाएं जुटाई जा सकें।