इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ साइंस विभाग की केमेस्ट्री बिगड़ गई है। मात्र 55 विद्यार्थियों वाले इस विभाग में 10 प्रोफेसरों के बीच विवाद चल रहा है। हालात इतने बिगड़े हैं कि बुधवार को विवाद सुलझाने पांच अधिकारियों-प्रोफेसरों की टीम को वहां पहुंचना पड़ा।
दो घंटे तक दोनों पक्ष- एक तरफ विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश चांद और दूसरी तरफ बाकी नौ प्रोफेसरों को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब टीम जल्द ही फिर समझाने जाएगी। डॉ. चांद वही विभागाध्यक्ष हैं जिन्होंने महज चार दिन की शॉर्ट अटेंडेंस पर अतिरिक्त कक्षाएं लगवाने के बजाय नियम का हवाला देकर 9 छात्रों को परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया था।
कोई भी गलती मानने को तैयार नहीं
दोनों पक्ष अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। विभागाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले डॉ. आनंदकर का कहना है कि न केवल फैकल्टी और नॉन टीचिंग स्टाफ बल्कि छात्र तक इनकी मनमानी से त्रस्त हैं। दूसरी तरफ विभागाध्यक्ष का कहना है कि मैं नियम से चलता हूं। दो घंटे की चर्चा के बाद भी कमेटी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इस विभाग में 50 से कुछ ही ज्यादा छात्र हैं। यानी पांच छात्रों पर एक प्रोफेसर और वो भी विवाद में लगे हैं।
विवाद जो खत्म ही नहीं होते
> विभागाध्यक्ष पर अन्य प्रोफेसरों को लैब अलॉट न करने का विवाद।
> एनिमल हाउस से जुड़े बिल विभागाध्यक्ष द्वारा रोके जाने से उपजा विवाद। डॉ. चांद औैर डॉ. आनंदकर आमने-सामने।
> कम्प्यूटर को लेकर विभागाध्यक्ष रहे डॉ. गुरुप्रसाद औैर डॉ. चांद का विवाद।
> बार-बार छात्रों को क्लास से बाहर करने और परीक्षा से रोकने पर अलग-अलग छात्रों से विवाद।
> विभागाध्यक्ष और कर्मचारियों का विवाद। विभागाध्यक्ष समय पूरा होने के बाद भी काम करवाते हैं।
छोटा-सा मामला है, बेवजह तूल दे रहे हैं
लाइफ साइंस विभाग में छोटे-छोटे मुद्दे को लेकर विवाद है। हमने सबके बयान लिए हैं। जल्द रिपोर्ट बनाकर सौंपे देंगे।
- डॉ. नरेंद्र धाकड़, जांच कमेटी प्रमुख