धार. धार जिले के इब्राहिमपुरा की चंपा मौर्य 1 अक्टूबर को कोरिया के इंचियोन में चल रहे एशियाड में चप्पू से डोंगी (छोटी नाव) चलाएगी। दो ब्लैड वाले चप्पू से डोंगी चलाने वाली सलालोम विधा में भाग लेंगी। वे 2008 से भोपाल की वाटर स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। जबरदस्त प्रदर्शन के आधार पर चंपा का चयन केनोइंग-कयाकिंग दल में हुआ।
धार के क्रीड़ा प्रभारी सदानंद टिल्लू ने बताया चंपा गंगानगर कन्या आश्रम में रहते हुए तिरला के उत्कृष्ट विद्यालय में रह रही थी। दौड़, खो-खो, तीरंदाजी में भाग लिया था। तैराकी में अत्यधिक रुचि होने से भोपाल वाटर स्पोर्ट्स एकेडमी में 2008 में भेजा था, जहां उसका चयन हो गया।
एकेडमी में मोहन शाक्य व अन्य प्रशिक्षकों ने चंपा को केनोइंग-कयाकिंग (नाव चालन) का प्रशिक्षण दिया। कयाकिंग की सलालोम विधा में चंपा राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत चुकी हैं। इसी आधार पर भारतीय दल में चयन हुआ। चंपा आदिवासी परिवार से हैं, चार भाई व पांच बहनों में सबसे छोटी है।
यह है कयाकिंग
डोंगी चालन दो तरह की विधाओं में होता है। कनाडियन और कयाकिंग। कनाडियन में चप्पू पर एक ही ब्लैड होता है। चालक को घुटने के बल बैठ चप्पू को दोनों तरफ इस्तेमाल करना होता है। कयाकिंग में चप्पू के दोनों तरफ ब्लेड होता है। चालक को दोनों तरफ पानी काट आगे बढ़ना होता है। चंपा दोनों तरफ ब्लैड वाले चप्पू से डोंगी चलाएंगी।