(अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा मासूम कुंदन।)
इंदौर. तीन साल के बच्चे को मृत समझ परिजन उसे दफनाने के लिए श्मशान घाट ले गए, मगर वहां अचानक उसकी सांस चलने लगी। परिवार का गम खुशी में बदल गया। फिलहाल बच्चे का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वाकया है मासूम कुंदन का। सात दिन पहले असरावद गांव स्थित घर में पैसों की जिद करते-करते वह अचानक सख्त फर्श पर गिर पड़ा था। रोते-रोते झटके से उठा और फिर गिर पड़ा। ऐसा गिरा कि आंखें ही फेर ली।
अपाहिज पिता चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। मां पड़ोसियों को लेकर एमवाय अस्पताल पहुंची। छह दिन इलाज चला। सुधार नहीं हुआ तो शनिवार रात परिजन उसे बॉम्बे हॉस्पिटल ले गए। सुबह तक बच्चे की हालत में सुधार नहीं होने पर घर ले जाने का फैसला कर लिया।
गांव ले जाने तक बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी। परिजनों ने उसे मृत समझ लिया। वे बच्चे को अस्पताल से सीधे श्मशान ले गए। गाड़ने के लिए घास उखाड़कर खुदाई शुरू ही होने वाली थी कि बच्चे के गले से खराश जैसी आवाज आई। देखते ही देखते सांस शुरू हो गई। कुंदन के चाचा उसे सीधे खातीवाला टैंक स्थित एक अस्पताल ले गए, जहां उसका फिर इलाज शुरू हुआ है।
अब फिर अस्पताल में संघर्ष कर रहा है कुंदन
अपनी मर्जी से ले गए परिजन
बॉम्बे अस्पताल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर के मुताबिक परिजनों को बच्चे की स्थिति के बारे-बारे में साफ-साफ बता दिया था। उसकी हालत बेहद नाजुक थी। परिजन अपनी मर्जी से बच्चे को डिस्चार्ज करवाकर घर ले गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने उसे ले जाने या नहीं ले जाने के संबंध में कोई बात नहीं कही थी।
दिमाग में खून का प्रवाह ठीक नहीं
अब बच्चे का इलाज कर रहे डॉ. अनिल गुर्जर के मुताबिक बच्चे के दिमाग में खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो रहा है। जब प्रवाह बेहद मंद हो जाता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह मर चुका है। इस बीमारी का इलाज बेहद मुश्किल है।
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