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  • बड़ों ने ध्यान नहीं दिया तो खेल के बाड़े की सफाई के लिए बच्चों ने चुना ‘पार्षद’

ये है 13 साल का 'नेता', बड़ों ने ध्यान नहीं दिया तो वोटिंग कर चुना लीडर

7 वर्ष पहले
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देवास. खेल के बाड़े की हालत खस्ता हो गई। बड़ों का कई बार ध्यान दिलवाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हारकर बच्चों ने खेल-खेल में इसकी सूरत बदलने की ठान ली। इस सोच को हकीकत में बदलने के लिए बच्चों ने अलग से ‘अपना पार्षद’ चुन लिया, वह भी लोकतांत्रिक तरीके से। चुना गया पार्षद 13 साल का वंश पुजारी है।
अब बच्चे पैसा इकट्ठा करेंगे। चाहे कोई पांच दे या 500 रु., वही लेंगे। अपने पार्षद की लीडरशिप में अखाड़े और बाड़े में सफाई, लाइट लगाने सहित तमाम काम कराए जाएंगे। मामला देवास के कृष्णापुरा स्थित सीताराम अखाड़े व खेल के बाड़े का है।
ऐसे चुना गया पार्षद वंश
नामांकन फॉर्म की कीमत 20 रु. (प्रतिभूति राशि) तय की गई। प्रतीकात्मक रूप से बीजेपी, कांग्रेस के उम्मीदवार के अलावा एक निर्दलीय भी मैदान में था। करीब 50 बच्चों ने उम्र, नाम, पता लिखकर मतपर्ची बांटी। बच्चों को वोट डालने का निमंत्रण दिया। 14 दिसंबर का दिन वोटिंग के लिए तय किया। करीब चार घंटे में 200 से ज्यादा बच्चों ने अखाड़े में ही बने मतदान केंद्र पर वोट डाले।
वोट देने से पहले एक स्याही भी अंगुली पर लगाई गई। दोपहर तीन बजे मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया गया जिसमें बीजेपी के उम्मीदवार वंश को सबसे अधिक 143 वोट मिले, जिन्हें विजेता घोषित किया गया। बच्चों ने बताया प्रतीकात्मक रूप से पार्टियों के नाम देकर उम्मीदवार खड़े किए थे, इसका पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं था।
शुभम वर्मा, आशीष परमार, साहिल दायमा, आकाश पुजारी व हर्ष अग्रवाल ने चुनाव की सभी प्रक्रिया पूरा करवाई। तीन उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से जमा हुए 60 रु. भी कोष में रखे जाएंगे।
आवारा युवक बाड़े में आते हैं, अब हम यहां काम कराएंगे : वंश ने बताया अखाड़ा खस्ताहाल है। खेलने के बाड़े की हालत और भी खराब है। बाड़े में बाहर से कुछ आवारा युवक आते हैं और सिगरेट, पाउच फेंक जाते हैं। हमने अपने बड़ों को बताया था पर उन्होंने फिक्र नहीं की। अब हम बच्चे यहां नियमित रूप से यहां काम कराएंगे। लाइट लगाना, घास काटना आदि काम इसमें शामिल है।
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