इंदौर. पीएमटी-2009 के फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) भी सवालों के घेरे में आ गया है। एसआईटी (विशेष जांच टीम) अब इस बात की जांच कर रही है कि डीएमई की काउंसलिंग कमेटी ने काउंसलिंग के दौरान फोटो मिलान क्यों नहीं की?
यदि मिलान की तो गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ में आई? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि परीक्षा में फर्जी छात्र बैठे थे, परीक्षा फार्म पर भी उन्हीं के फोटो थे, जबकि काउंसलिंग में असली छात्र शामिल हुए। एसआईटी अब इस मामले में कमेटी में शामिल रहे अधिकािरयों से भी पूछताछ करेगी।
इंदौर एसआईटी प्रभारी एएसपी देवेंद्र पाटीदार और सीएसपी अजय जैन ने 2009 पीएमटी में हुए फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की। छात्रों को स्कोरर उपलब्ध करवाने वालों में सबसे बड़ा गिरोह गोरखपुर के आरोपी विंध्यवासिनी का होना पता चला है।
इसके अलावा अन्य गिरोह व उनके सरगनाओं से पूछताछ में सामने आया कि छात्र से रकम तय हो जाने के बाद परीक्षा फॉर्म में स्कोरर का फोटो लगाया जाता था। यह फोटो एडमिट कार्ड के अलावा व्यापमं द्वारा परीक्षा सेंटर पर भेजी सूची में भी रहता है।
सिलेक्शन होने के बाद व्यापमं की रिजल्ट सूची में भी स्कोरर का ही फोटो जाता है। यह सूची डीएमई की काउंसलिंग कमेटी को भेजी जाती। काउंसलिंग में कभी स्कोरर नहीं जाता। वहां असली छात्र ही जाता है और फिर उसे कॉलेज अलॉट किया जाता है।
लापरवाही या मिलीभगत?
आरोपियों के खुलासे के बाद एसआईटी के अधिकारियों ने एसटीएफ से बात की, फिर डीएमई ऑफिस से जानकारी ली गई। वहां के अधिकारियों ने पुलिस को बताया फोटो का मिलान सही होता था, हो सकता है स्कोरर ही काउंसलिंग में आया हो। यह जवाब इसलिए सही नहीं लग रहा, क्योंकि किसी भी गिरोह ने स्कोरर को काउंसलिंग में भेजे जाने का खुलासा नहीं किया। पुलिस अब काउंसलिंग कमेटी में शामिल होने वाले तत्कालीन अधिकारियों की जानकारी निकाल रही है।
लापरवाही हो सकती है
परीक्षा के बाद व्यापमं रिजल्ट की सूची डीएमई को भेजता था। काउंसलिंग के समय फोटो मिलान कर लिए जाते तो गड़बड़ी पकड़ी जाती। लापरवाही कई स्तर पर हुई है। जांच कर रहे हैं। -देवेंद्र पाटीदार, एएसपी
काउंसलिंग कमेटी का काम ही होता है कि फोटो और छात्र का मिलान करने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करे। 2009 में कौन अधिकारी कमेटी में रहे। यह पता लगाना होगा। इसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।
-डॉ. एसएस कुशवाह, डायरेक्टर, डीएमई
एसटीएफ का छापा, स्कूल छोड़कर जंगल में भागे प्राचार्य
व्यापमं घोटाले में धरपकड़ के लिए भोपाल एसटीएफ की टीम बुधवार को खंडवा आई। बेटी को पास कराने के लिए 15 लाख रुपए देने के आरोपी भालसिंह डाबर के लवकुशनगर स्थित घर पहुंची। श्री डाबर घर पर नहीं मिले। वे चिचगोहन हायर सेकंडरी स्कूल में प्राचार्य है। टीम उनके स्कूल पहुंच गई। पुलिस के आने की भनक लगते ही प्राचार्य श्री डाबर खेतों से होते हुए जंगल में भाग गए। पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।
प्राचार्य पर पीएमटी में बेटी निकिता के सिलेक्शन के लिए 15 लाख रुपए की रिश्वत देने का आरोप है। एसटीएफ डीएसपी एसएस भूरिया ने बताया प्राचार्य श्री डाबर एसटीएफ के रिकार्ड में तीन माह से फरार है। उनसे एक बार पूछताछ हुई थी। फिर बाद में बुलाया तो वे नहीं आए। इसलिए गिरफ्तार करने आए थे।
पुलिस टीम को देख लवकुश नगर में हड़कंप
बुधवार दोपहर 12.30 बजे अचानक नवचंडी मंदिर क्षेत्र के लवकुश नगर में एसटीएफ के 8-10 अधिकारी व जवान वाहन से उतरे और भालसिंह डाबर के मकान में घुस गए। कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। एसटीएफ के अधिकारियों ने लोगों से प्राचार्य के बारे में पूछताछ की। इसके बाद एसटीएफ की टीम चिचगोहन पहुंची। प्राचार्य की पत्नी मीना डाबर बड़वानी जिले के शासकीय सहकारी संस्था में सहायक आयुक्त है।
मेरी जमानत हो गई
हाईकोर्ट से मेरी जमानत हो गई है लेकिन मैं एसटीएफ के समक्ष पेपर पेश नहीं कर सका। जल्द ही एसटीएफ को जमानत के पेपर पेश कर दूंगा।’
- भालसिंह डाबर, प्राचार्य, चिचगोहन शासकीय स्कूल