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साथ खाना खाया फिर फांसी लगा ली

9 वर्ष पहले
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इंदौर। न्यू राज मोहल्ला में मंगलवार को दंपती ने फांसी लगाकर जान दे दी। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चला है। घटना से पहले दंपती ने साथ खाना खाया था। फिर बच्चों को स्कूल छोडऩे भी गए थे।


टीआई सीताराम यादव के अनुसार उमेश (34) पिता लक्ष्मीनारायण प्रजापत और पत्नी भावना (28) ने दोपहर में जब खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खोला तो चचेरे भाई कपिल ने परिजनों को बुलाकर दरवाजा तोड़ा। भीतर उमेश और साधना फंदे पर लटके थे। फंदा काटकर दोनों को बाफना अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार वे संयुक्त परिवार में रहते थे। उनकी बेटी हनी (5) और बेटा समर्थ (3) हैं। उमेश का पहली मंजिल पर कमरा है, जबकि बड़े भाई वीरेंद्र नीचे रहते हैं। उमेश र्ईंट का कामकाज करते थे। सुबह 10 बजे चचेरा भाई कपिल दोनों से मिलने आया था। उनसे कुछ देर बात कर वह चला गया। दोपहर 1 बजे कपिल उमेश
से मिलने फिर पहुंचा तो वे दोनों फंदे पर मिले।


सुबह ही तो फूल देकर गया था पड़ोसियों का कहना है कि पति-पत्नी मिलनसार थे। घर में फूल बांटने वाला युवक रास्ते से गुजरा तो घर से आने वाली चीखें सुनकर पूछताछ की। इसके बाद उसकी आंखें भर आईं। उसने कहा- उमेश भैया को मैं सुबह तो फूल देकर गया था तब वे खुश थे। बच्चों को स्कूल छोडऩे गए थे परिजनों ने बताया दोनों ने साथ खाना खाया था। उसके बाद बच्चों को तैयार कर वैष्णव स्कूल छोडऩे गए थे। फिर कमरे में चले गए। दोपहर में जब कपिल उन्हें बुलाने गया तो घटना का पता चला।


बच्चों के बैग खंगाले
दोनों के शवों का जिला अस्पताल में पीएम हुआ। एफएसएल टीम के प्रभारी डॉ. सुधीर शर्मा ने फंदों से लेकर कमरे का नाप लिया। बच्चों के बैग भी खंगाले, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। मल्हारगंज पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है। रात तक आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है।

मायके में की थी फोन पर बात
परिजन ने बताया भावना ने घटना से पहले फोन लगाकर बड़वानी में रहने वाले माता-पिता से सामान्य बात की। जब उन्हें पता चला कि बेटी दामाद ने खुदकुशी कर ली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे यही सोचते रह गए कि उनकी चंचल बेटी को ऐसा क्या गम था कि उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।


बच्चे पूछ रहे माता-पिता के बारे में बेटे-बहू की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। परिचितों ने बताया उमेश के पिता समाज में अच्छी पैठ रखते हैं। उन्होंने सिरपुर के पास अंबारनगर में 50 लाख का एक प्लॉट समाज की धर्मशाला बनाने के लिए दान में दिया था। घटना के बाद से उमेश के माता-पिता बेहाल हैं। दोनों बच्चे तो समझ भी नहीं पा रहे हैं कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे बार-बार दादा-दादी से उनके बारे में पूछ रहे हैं। पिता लक्ष्मीनारायण का कहना है हमसे ऐसी क्या भूल हो गई कि ऐसा कदम उठाने से पहले हमें बताया भी नहीं। जीवनभर यही प्रश्न रहेगा कि उनके आत्महत्या करने के पीछे वजह क्या थी।