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सिर में गोली लगने के 11 महीने बाद व्यापारी की मौत

8 वर्ष पहले
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इंदौर। 11 महीने पहले सुयश हॉस्पिटल में सिर में गोली लगने से घायल ट्रांसपोर्ट व्यापारी की रविवार रात मौत हो गई। वे घटना के बाद से बिस्तर पर थे और दो ऑपरेशन के बावजूद सुधार नहीं हुआ था। याददाश्त भी बार-बार चली जाती थी। दोस्त ने ही 15 लाख रुपए की सुपारी देकर उन पर हमला कराया था।

धर्मेंद्र पिता हुकुमसिंह निवासी रतलाम कोठी को रात डेढ़ बजे परिजन सुयश अस्पताल लेकर पहुंचे। भाई दीपेंद्र ने बताया सिर में तेज दर्द होने से धर्मेंद्र कराह रहे थे। इलाज शुरू होने के कुछ देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। पत्नी विनीता और 12 वर्षीय बेटी भूमिका को परिजन ने आखिर तक धर्मेंद्र की मौत की सूचना नहीं दी। सोमवार को एमवाय में पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर ले जाया गया, तब उन्हें पता चला। धर्मेंद्र का 18 वर्षीय बेटा यश पुणे के कॉलेज में पढ़ रहा है। उसे परिजन ने झूठ बोलकर बुलाया।

दो आरोपी जेल में, बाकी जमानत पर
धर्मेंद्र के दोस्त मनीष उर्फ मन्नू जुनेजा निवासी गुलमोहर एक्सटेंशन ने ही उन्हें मारने की सुपारी 15 लाख में दी थी। उसे धर्मेंद्र को 50 लाख रुपए लौटाने थे। मन्नू साकेत नगर के आर जिम में जाता था। वहां के ट्रेनर राहिल गोडा निवासी रवि नगर के साथ उसने हत्या की साजिश रची। राहिल ने शूटरों के लिए दोस्त पंकज शर्मा निवासी स्कीम 74 और शब्बीर उर्फ मोहम्मद शादाब निवासी नया बसेरा से बात की। पंकज जंजीरावाला चौराहा स्थित अपोलो स्क्वेयर में डोकोमो कंपनी के स्टोर का मैनेजर था।

उसने छोटी खजरानी में कबाड़ का काम करने वाले विक्की उर्फ विक्रम मालवीय और मनीष अमोर निवासी नया बसेरा को हमले के लिए तैयार किया। मन्नू ने ही उन्हें पिस्टल और देशी कट्टा दिया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। विक्रम और मनीष जेल में हैं, बाकी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। इस मामले में पुलिस हत्या की धारा बढ़ाएगी।

76 दिन तक अस्पताल में रहे
धर्मेंद्र का ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रक और बस बॉडी बिल्डिंग का काम है। पिछले साल 28 अगस्त को वे सुयश हॉस्पिटल में भर्ती छोटे भाई नितेंद्र उर्फ टीटू की पत्नी प्रीति के लिए टिफिन लेकर गए थे। पार्किंग में उन पर बाइक सवार बदमाशों ने गोली चलाई थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर सिर से गोली निकाली।

22 दिन बाद उन्हें होश आया था। 54 दिन उन्हें आईसीयू में रखा गया और घटना के 76 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली। घर में वे बिस्तर पर ही थे। सिर में गहरी चोट के कारण वे बार-बार बातों को भूल जाते थे। कभी अपना नाम भी याद नहीं रहता था। कई बार उनकी तबीयत बिगड़ी और परिजन अस्पताल ले गए।