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डॉक्टर ने पेट चीरा, 6 लाख मांगे, नहीं दिए तो सिल दिया : परिजन का आरोप

9 वर्ष पहले
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इंदौर । लाइफ लाइन अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों ने एक महिला का पेट चीर तो दिया लेकिन बाद में बिना ऑपरेशन किए ही सिल दिया। ऑपरेशन बच्चेदानी की गठान निकालने के लिए किया जाना था। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने पहले कहा था कि ऑपरेशन में 28 हजार रुपए लगेंगे, लेकिन ऑपरेशन थिएटर में पेट चीरने के बाद वे छह लाख रु. मांगने लगे। रुपए नहीं दिए तो गठान नहीं निकाली। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि छह लाख रुपए मांगे नहीं, परिजनों को केवल खर्च बताया था।

परदेशीपुरा में रहने वाली 32 वर्षीय अर्चना पिता ओमप्रकाश बियाणे की बच्चादानी में छह साल से गठान है। अर्चना ने बताया- पांच दिन पहले मैं डॉ. सुष्मिता मुखर्जी के एलआईजी तिराहा स्थित क्लीनिक पहुंची। उन्होंने मेरी सोनोग्राफी कराई। रिपोर्ट देखकर कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। कुछ दिन पहले ही हम ऐसा ऑपरेशन कर चुके हंै। इसका खर्च 28 हजार रु. आएगा। खून चढ़ाना पड़ा तो प्रति बॉटल दो हजार रुपए अलग लगेंगे। उनके कहने पर सोमवार सुबह मैं लाइफ लाइन हॉस्पिटल में भर्ती हो गई।
अर्चना की बहन ममता ने बताया कि डॉ. सुष्मिता ने कहा था कि मेरे साथ एक स्पेशलिस्ट डॉ. नरेंद्र पाटीदार भी ऑपरेशन करेंगे। उनकी फीस 12 हजार रु. अलग से लगेगी। हम इस पर भी राजी हो गए। अर्चना को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के थोड़ी देर बाद ओटी से एक नर्स आई और कहा डॉक्टर बुला रहे हंै। हम अंदर पहुंचे। उस समय तक डॉक्टर अर्चना का पेट चीर चुके थे। वे गठान दिखाकर कहने लगे कि इसका ऑपरेशन नहीं हो सकेगा। ऑपरेशन हुआ तो छह लाख का खर्च आएगा। शेष -पेज 15
हमने इतने रुपए खर्च करने में असमर्थता जताई तो उन्होंने पेट सीलकर वापस वॉर्ड में भेज दिया। अर्चना के भाई राजू ने बताया कि बाद में डॉक्टर अर्चना को देखने तक नहीं आए। हमनें एमआईजी थाने में शिकायत की है।

हंगामा किया, मारपीट हुई
पुलिस मंगलवार सुबह कार्रवाई करने अस्पताल नहीं पहुंची तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। वे डॉ. सुष्मिता और डायरेक्टर असलम चरा को बुलाने की मांग करने लगे। वे वॉर्ड में नहीं आए तो परिजन की नर्स ज्योति व मैनेजर से बहस हो गई। मारपीट भी हुई। परिजनों का कहना है कि हंगामे के बाद डॉ. मुखर्जी ने हमें लिखित आश्वासन दिया कि वे अर्चना के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगी।


उस वक्त ऑपरेशन संभव नहीं था
अर्चना का केस उलझा हुआ था। सोनोग्राफी में गठान छोटी दिख रही थी, लेकिन पेट चीरने के बाद गठान ज्यादा बड़ी निकली। ऐसे में उस समय ऑपरेशन करना संभव नहीं था। डॉ. सुष्मिता ने परिजन से छह लाख रु. नहीं मांगे थे। उन्हें केवल खर्च बताया था।
- असलम चरा, डॉयरेक्टर लाइफ लाइन अस्पताल
जान का खतरा था ऑपरेशन में
अर्चना को ऐसी बीमारी है जिसमें बड़ी आंत यूट्रस से चिपक जाती है। ऑपरेशन करने पर बड़ी आंत में छेद हो जाता है, जिसमें जान जाने का खतरा है। पहले इसे दवाइयों से ऑपरेशन करने लायक बनाया जाता है फिर ऑपरेशन होता है। इसमें 5-6 लाख का खर्च आता है। मैंने उन्हें इलाज का खर्च उठाने का कोई आश्वासन नहीं दिया है।
डॉ. सुष्मिता मुखर्जी

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