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सर्दी-जुकाम हो तब भी डॉक्टर को दिखाएं

9 वर्ष पहले
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इंदौर। स्वाइन फ्लू शहर में पैर पसार रहा है। एक ही हफ्ते में चार मरीज इसकी चपेट में आ गए। इनमें से नमकीन व्यवसायी की सोमवार को मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। एमवायएच में अलग वार्ड तैयार किया है। बीमारी से संबंधित गाइडलाइन अस्पतालों को भेजी गई है।

स्वाइन फ्लू का वायरस ठंड में ही जोर पकड़ता है, इसलिए अधिकारी भी सतर्क हैं। जिन तीन मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई है, उनकी हालत गंभीर है। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलेंस प्रोग्राम शाखा के अनुसार तीनों एक ही निजी अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटीलेटर पर हैं। उन्हें टेमीफ्लू दी जा रही है। इसके अलावा गुमाश्तानगर व चंदननगर से भेजे गए दो सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। शाखा इंचार्ज डॉ. जी.एल. सोढ़ी ने बताया यह पता किया जा रहा है कि मरीजों के परिवार में किसी को सर्दी-जुकाम या अन्य परेशानी तो नहीं है। जिस मरीज की मौत हुई, उसके परिजनों में किसी को इन्फेक्शन के लक्षण नहीं हैं लेकिन एहतियातन उन्हें समझाया है कि मामूली सर्दी-जुकाम हो, तब भी डॉक्टर से जांच करवाएं और टेमीफ्लू लें।


वेंटीलेटर जरूरी, लेकिन इन्फेक्शन का खतरा भी- उखड़ती सांसों को थामने के लिए मरीज को वेंटीलेटर पर रखा जाता है लेकिन लंबे समय तक वेंटीलेटर सपोर्ट के कारण इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार तीन-चार दिन तक मरीज वेंटीलेटर पर रहता है तो उसे वेंटीलेटर एसोसिएट निमोनिया (वीएपी) होने की आशंका रहती है। इसके अलावा मरीज को पाइप, श्वास नली, कैथेटर, आहार नली लगाई जाती है। उनके कारण भी सेकंडरी इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। पहला बीमारी का इन्फेक्शन और दूसरा अस्पताल का।


बीमारी के लक्षण

  • तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, नाक बंद होना, गले में खराश व खांसी, बदन दर्द, उल्टी आदि।
  • बुखार सात दिन में नहीं उतरता। कभी बलगम के साथ खून भी आ सकता है।
  • कई बार नाखून नीले पडऩे लगते हंै।

(ये लक्षण सामान्य बीमारी में भी होते हैं, इसलिए एहतियातन तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।)

ऐसे करें बचाव

  • खांसी या छींक आने पर मुंह को रूमाल या टिशू पेपर से ढंक लें।
  • छींकने या खांसने के बाद हाथ साबुन से धोएं ताकि इन्फेक्शन न फैले।
  • साफ रूमाल रखें और उसे रोज बदलें।
  • आंख, नाक व मुंह को हाथ न लगाएं, क्योंकि इससे वायरस फैलता है।