इंदौर. एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. पी.एस. ठाकुर को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संभवत: एक-दो दिन में आदेश जारी हो जाएंगे। करोड़ों के कायाकल्प के अलावा कई बड़े प्रोजेक्ट अस्पताल में शुरू होने जा रहे हैं, ऐसे में सख्त प्रशासक के तौर पर पहचाने जाने वाले डॉ. ठाकुर को हटाने की खबर सोमवार को दिनभर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में चर्चा का विषय बनी रही।
सूत्रों की मानें तो प्रमुख सचिव ने फाइल अनुमोदन के लिए विभागीय मंत्री तक पहुंचा दी है। अंतिम मुहर लगना बाकी है। डॉ. ठाकुर के कार्यकाल को दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, ऐसे में शासन के इस निर्णय के पीछे की वजह क्या रही? इस बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
ये है पर्दे के पीछे की कहानी
> कुछ दिन पहले काम में कोताही बरतने की बात पर नर्सों के साथ उनका विवाद हुआ।
> सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिले नोटिस के बाद उन्होंने क्लीनिकल ड्रग ट्रायल अनुबंध की कॉपी मेडिकल कॉलेज से मांग ली। एक तल्ख चिट्ठी भी लिख डाली।
> अस्पताल में करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट शुरू होने वाले हैं। ऐसे में कुछ लोग उन्हें हटाए जाने की जुगत में भी लगे।
ऑफ द रिकॉर्ड
> भोपाल के एक अफसर ने कहा- यह शासन और मंत्रालय के बीच का मामला है।
> एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ अधिकारी इस फैसले के पीछे राजनीतिक कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई दिनों से यह सुगबुगाहट चल रही है। हाल ही में नर्सों के विरोध प्रदर्शन ने आग में घी का काम किया और शासन को ऐसा फैसला लेने की ठोस वजह मिल गई।
चर्चा में कई नाम
अधीक्षक पद के लिए हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भार्गव, डॉ. शिवशंकर शर्मा, कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय दीक्षित और पूर्व उपअधीक्षक डॉ. ए.डी. भटनागर, पूर्व अधीक्षक डॉ. सलिल भार्गव आदि के नामों पर चर्चा है। बताया जाता है कि इनमें से एक नाम पर सहमति भी बन चुकी है। फाइल साइन होने के लिए विभागीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पास गई है।
इच्छाशक्ति है
डॉ. ठाकुर में काम करने की इच्छाशक्ति है, लेकिन कई प्रोजेक्ट को मूर्तरूप देना बाकी है। सख्त प्रशासक के तौर पर वे बेहतर काम कर रहे हैं।
-सतीश रेवाल, सचिव, मप्र शास. कर्म. संघ