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डाउनलोड करेंइंदौर। जबलपुर हाई कोर्ट के निर्देश पर कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय से हाथी के जोड़े (मोती-चंपा) को जंगल में छोडऩे की तैयारी भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन शिफ्टिंग के बारे में सोचकर ही चिडिय़ाघर और वन अफसरों के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
फिलहाल भोपाल मुख्यालय से वेटरनरी डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम चिडिय़ाघर पहुंचेगी और मोती-चंपा का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। फिर टीम वन विभाग को रिपोर्ट सौंपेगी। उसके बाद ही शिफ्टिंग होगी। लगभग 32 साल बेडिय़ों में बंधे रहने के बाद पहली बार हाथी का यह जोड़ा पूरी तरह जंजीरों से आजाद हो रहा है, इसलिए उसे काबू में रखना बेहद जरूरी होगा।
आठ घंटे से ज्यादा बेहोश रखना मुश्किल- वन विभाग का सबसे बड़ा तनाव इस बात को लेकर है कि कान्हा किसली, बांधवगढ़ में उसे छोडऩे के लिए कौन-सी गाड़ी तय की जाए। अगर ट्राले में ले जाएंगे तो बिना बेहोश किए ले जाना संभव नहीं है। वहीं, वेटरनरी डॉक्टरों के अनुसार आठ घंटे से ज्यादा लगातार बेहोश रखना भी खतरे से खाली नहीं होगा। क्योंकि जब होश आने पर हाथी गाड़ी में ही तोड़-फोड़ मचा सकते हैं। इसमें उन्हें भी नुकसान पहुंच सकता है।
मचा चुका है उधम- 18 जून 2006 को मोती को बेडिय़ों से मुक्त किया गया था। महज तीन-चार दिन बाद ही उसने पूरे चिडिय़ाघर में खूब उधम मचाया था। दिनभर चिडिय़ाघर बंद रहा और दर्शकों को लौटाना पड़ा था।
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