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नकल के लिए बदनाम कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाना मजबूरी

9 वर्ष पहले
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इंदौर. यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 6 मार्च से शुरू होने वाली प्राइवेट और अप्रैल में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए केंद्र नहीं मिल रहे हैं। कई बड़े कॉलेज परीक्षा केंद्र बनने से इनकार करे रहे हैं। अब प्रबंधन के सामने नकल के लिए बदनाम या सुविधाओं में पिछड़े कॉलेजों को केंद्र बनाने के अलावा विकल्प नहीं है।
प्रमुख कॉलेजों का कहना है उनके यहां सुबह बीकॉम की कक्षाएं लगती हैं और कुछ कॉलेजों में दोपहर की शिफ्ट में स्कूल लगते हैं। ऐसे में सुबह सात से 10 बजे बीकॉम और दोपहर में तीन से छह बजे बीए, बीएससी की परीक्षाएं कराना आसान नहीं होगा।
यूनिवर्सिटी की बीकॉम, बीए और बीएससी दूसरे और तीसरे वर्ष की प्राइवेट परीक्षाएं मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हो रही हैं, जबकि अभी एमकॉम, एमए और एमएससी की परीक्षा का तो टाइम-टेबल ही नहीं आया। उसके लिए अलग से केंद्र ढूंढने पड़ेंगे। यूनिवर्सिटी को इन परीक्षाओं के लिए लगभग 50 केंद्र चाहिए लेकिन 40 केंद्र तय करने में भी उसे दिक्कत आ रही है।
कॉलेजों के तर्क
कई कॉलेजों का कहना है कि सेमेस्टर सिस्टम में सालभर पढ़ाई होने से प्राइवेट परीक्षा करवाना संभव नहीं।
इससे पढ़ाई प्रभावित होगी तो कुछ कॉलेजों का मानना है कि स्कूल भी साथ चलने से बोर्ड परीक्षाएं भी होंगी।
यूनिवर्सिटी की परेशानी
कई ऐसे कॉलेजों को केंद्र बनाना पड़ रहा है जिनकी संबद्धता कई बार खारिज हो चुकी है।
ऐसे कॉलेजों को केंद्र बनाना पड़ रहा है जो या तो नकल के लिए बदनाम हैं या बैठक व्यवस्था बेहद खराब है।
जल्द बना लेंगे सारे केंद्र
केवल कुछ केंद्र रह गए हैं। जल्द ही सारे केंद्र बना लेंगे। कॉलेजों से चर्चा जारी है और किसी भी ऐसे कॉलेज को केंद्र नहीं बनाएंगे जो परेशानी का कारण बने।
डॉ. आर.के. चतुर्वेदी, परीक्षा नियंत्रक, यूनिवर्सिटी