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स्वाइन फ्लू का महंगा इलाज: साढ़े पांच लाख रुपए खर्च, फिर भी नहीं बच पाई जान

6 वर्ष पहले
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इंदौर. स्वाइन फ्लू के मरीजों का सामना महंगे इलाज से भी हो रहा है। जिन पर वायरस का अटैक मजबूती से हुआ है, उन्हें तीन से चार दिन में ही वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है। प्राइवेट अस्पताल में वेंटीलेटर सहित बीमारी का खर्च रोजाना औसतन 10 हजार रुपए तक पड़ रहा है। महेश्वर की एक महिला के इलाज पर साढ़े पांच लाख रुपए खर्च हुए फिर भी वह नहीं बच पाई।

एमवायएच अस्पताल में पिछले दिनों एक महिला को एमवायएच रैफर किया गया था। जिस दिन रैफर किया गया, उसी दिन उसकी मौत हो गई। परिजन प्राइवेट हॉस्पिटल में ढाई लाख का बिल चुकाकर आए थे। एक डॉक्टर के मुताबिक एल्बोमीन दवा की बाजार में किल्लत है। पांच से दस हजार रुपए में यह दवा आती है। हजारों रुपए के महंगे एंटीबायोटिक भी देना पड़ रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के डॉक्टर मनीष जैन ने कहा मरीज की स्थिति के हिसाब से एंटीबायोटिक देना होती है।
महंगी एंटीबायोटिक
महेश्वर की जिस महिला की मौत हुई उसका सैंपल भी नहीं भेजा गया जबकि टेमीफ्लू दी जा रही थी। सैंपल क्यों नहीं भेजा गया, इसका जवाब सरकारी अधिकारी भी नहीं दे पाए। महिला को दिन सर्दी-जुकाम हुआ। तेज बुखार आया और अचानक तबीयत बिगड़ गई। महिला के एक परिजन ने भास्कर से कहा सरकार तो केवल टेमीफ्लू उपलब्ध करवा रही है लेकिन हमें कई महंगी एंटीबायोटिक खरीद कर लाना पड़े। इस वजह से लंबा बिल बन गया।
रात को 11 बजे खुलवाया स्टोर, तब मिली दवाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टेमीफ्लू दवा देने में तंगी बरत रहे हैं। बार-बार प्राइवेट अस्पताल के कर्मचारियों को दवा लेने के लिए दौड़ लगाना पड़ रही है। केवल प्राइवेट ही नहीं बल्कि एमवायएच में भी डॉक्टर्स परेशान हो रहे हैं। रविवार को स्वास्थ्य अधिकारी संचालक डॉ. बी.एन. चौहान के साथ दौरे में व्यस्त रहा। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर बार-बार फोन घनघनाते रहे। रात को 11 बजे स्टोर खुलवाया तब जाकर 200 टेबलेट मिली।