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फिक्की के लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन फ्लो की शुरुआत, 43 वुमन मेम्बर्स बनीं

7 वर्ष पहले
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इंदौर. वुमन एंटरप्रेन्योर्स को बढ़ावा देने के लिए देश के 10 शहरों में ऑपरेट कर रहे फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़(फिक्की) के लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन यानी फिक्की फ्लो की शुरुआत बुधवार से शहर में हुई। यह फ्लो का 11 वां चैप्टर है जो इंदौर से ऑपरेट करेगा। बुधवार को रेडीसन ब्लू में इसकी लॉन्चिंग हुई।

वुमन एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए बना ऑर्गनाइज़ेशन हर तबके की महिलाओं के लिए है। लॉन्च पर विमनवेव चैरिटेबल ट्रस्ट की सीईओ व फाउंडर सैली होलकर, फ्लो की नेशनल प्रेसीडेंट नीता बूचरा व वाइस प्रेसीडेंट विनीता भिम्बे मौजूद थीं।
इन लेवल्स पर ऑपरेट करेगा फ्लो
1. ग्रास रूट लेवल- हर तबके की महिलाएं जो अपना बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं और हुनरमंद भी हैं उनकी ज़रूरतों को समझकर उन्हें मोटिवेट करेंगे।
2. मीडिल लेवल- स्किल डेवलपमेंट जिसमें उन्हें आर्ट फॉर्म्स सिखाए जाएंगे ताकि वे अजीविका चला सकें।
3. सीनियर लेवल- बिज़नेस सेट करने के लिए बैंक से हेल्प लेने में हेल्प करेंगे और लीगल इश्यूज़ पर फ्लो मेम्बर्स में शामिल लॉयर्स उनकी मदद करेंगी।
इंदौर में फिक्की फ्लो के एजेंडे

> वुमन एंटरप्रेन्योर्स को मोटिवेट करना
> आर्थिक मदद के बजाय खुद महिलाओं को ही धनार्जन के काबिल बनाना
> कन्या भ्रूण हत्या बंद करने की दिशा में काम
> एजुकेट न कर पाएं तो हेयर कटिंग या कढ़ाई बुनाई जैसी स्किल्स सिखाना
> बैंक से लोन दिलवाने के रास्ते में आने वाली कागज़ी कार्रवाइयों में सरल रास्ते बताना
> लीगल इश्यूज़ पर सही गाइडेंस देना और कम से कम उलझनें आने देना
> पुलिस के साथ मिलकर गृहिणियों, युवतियों और छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देना
> स्कूली बच्चियों को साइकिलें उपलब्ध कराना। ये बच्चियां स्कूल से निकलने के बाद साइकिलें यहीं छोड़ जाएंगी नई छात्राओं के लिए।
> हेल्थ-सेनिटेशन प्रोसीजर्स से अवेयर करना।
फ्लो की 150 सक्सेस स्टोरीज़ में शामिल दो स्टोरीज़
1. प्रोजेक्ट स्वयं
गांव से कुछ महिलाओं को मुंबई लाकर उन्हें नलिनी यास्मिन के सलून पर हेयर ड्रेसिंग का कोर्स कराया। आज वे खुद कमा रही हैं और बहुत खुश हैं।
2. द रोटी प्रोजेक्ट
फ्लो मुंबई ने पिछले दिनों द रोटी प्रोजेक्ट शुरू किया। इसमें गुजरात से आई कुछ महिलाएं जो टिफिन सेंटर्स के लिए रोटियां बना रही थीं, उनका खुद का व्यवसाय शुरू करवाया। अन्नपूर्णा आटा से गेहूं का आटा फ्लो ने स्पॉन्सर करवाया। महिलाओं ने घी चुपड़ी रोटियां और अचार बीएमसी स्कूल्स में भेजना शुरू कीं। आज वे अपना खुद का बिज़नेस बखूबी चला रही हैं।
काम उन्हें ही करना है, हम सिर्फ कैटेलिस्ट हैं
हम न तो एनजीओ हैं न ही आर्थिक मदद करने वाली संस्था। केमिकल रिएक्शन में केटेलिस्ट प्रकिया तेज़ कर देते हैं। हमारी भूमिका वही है। महिलाओं के लिए अनुकूल परिस्थितयां बनाना हमारा काम है।
-सैली होलकर