इंदौर. दो दिन से भले ही मौसम साफ है, लेकिन इससे पहले तक दिन की शुरुआत कोहरे के साथ हो रही थी। दोपहर तक कोहरे ने शहर को ढंके रखा। मौसम विभाग के पास उपलब्ध 85 साल के रिकॉर्ड के अनुसार पहली बार जनवरी में इतने ज्यादा दिन (11 दिन) कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के पुणे केंद्र के अनुसार इसके पूर्व 2006 में छह दिन और 1996 में पांच दिन घना कोहरा छाया था।
इस साल ठंड का असर भले ही कम महसूस हुआ हो, लेकिन सभी जिलों में कोहरा रहा। मौसम विभाग के पास कोहरे से संबंधित रिकॉर्ड 1969 से उपलब्ध है। इसके अनुसार 2014 में सर्वाधिक कोहरे वाले दिन रहे। मौसम वैज्ञानिक कोहरे की इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण इस पिछले साल मानसून में हुई अधिक बारिश को मान रहे हैं। बारिश के कारण नमी ज्यादा रही। उत्तरी हवाएं आई तो यह नमी कोहरे में तब्दील हो गई। कई दिनों तक आद्र्रता भी 80 फीसदी से ज्यादा रही जिससे भी कोहरे की स्थिति बनी।
बारिश रही मुख्य वजह
सामान्य रूप से ठंड में पश्चिमी विक्षोभ रुक-रुककर आते हैं लेकिन इस बार लगातार आते रहे। आमतौर पर दो से तीन सिस्टम जनवरी माह में बनते हैं लेकिन इस बार अभी तक पांच-छह सिस्टम (ऊपरी हवा मे चक्रवात) बन चुके हैं। मौसम केंद्र भोपाल के निदेशक डॉ.डी.पी. दुबे कहते है कि कई सालों बाद ऐसा हुआ है कि इतने सिस्टम बने हो। जिस साल ज्यादा बारिश होती है, उस साल कोहरा भी काफी होता है। बारिश के बाद नमी वातावरण में रह जाती है। जब उत्तरी ठंडी हवा आती है तो यह छोटी-छोटी बूंदों के रूप में जम जाती है।
एक दिन भी नहीं चली शीतलहर
इस बार भले ही कोहरा घना रहा हो लेकिन एक भी दिन शीतलहर की स्थिति नहीं बनी। जनवरी में सबसे कम न्यूनतम तापमान 11 जनवरी को 6.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य से तीन डिग्री कम था।
मौसम विभाग की मानें तो एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री नीचे आया हो। कई बार ठंडक ज्यादा महसूस हुई लेकिन पारा सामान्य ही रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इसे 'विंड चिल फैक्टर' कहते हैं। तापमान कम नहीं रहता है लेकिन हवा से ठंडक महसूस होती है। ऐसे में वास्तविक तापमान से कम तापमान महसूस होता है।