इंदौर. स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों से क्लाइंट फीड बैक फॉर्म भरवाएगा। उनसे जानकारी ली जाएगी कि उन्हें अस्पताल की सेवाएं कैसी लगीं। वे संतुष्ट हैं या नहीं? अगले एक-दो महीने में यह सिस्टम लागू हो जाएगा। अधिकारियों की मानें तो प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में रोज करीब नौ लाख मरीजों को दवाएं बांटी जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों में स्वास्थ्य गारंटी योजना लागू कर दी है। इसके लिए मरीजों को दी जाने वाली सेवाओं की समय सीमा भी तय कर दी है। नि:शुल्क दवाएं दी जा रही हैं। कुछ वर्गों के लिए सोनोग्राफी, एक्स-रे सहित अन्य जांचें नि:शुल्क कर दी गई हैं। मरीजों को इनका फायदा मिल रहा है या नहीं, इसके लिए अब यह प्रक्रिया की जा रही है। फीड बैक लेने के बाद जानकारी को कम्प्यूटर में डाला जाएगा। सीएमएचओ डॉ. महेश मालवीय ने बताया यह पहली बार है, जब पूरा डाटा कम्प्यूटरीकृत करेंगे।
हर महीने होगी समीक्षा- जेडी डॉ. शरद पंडित ने बताया प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में रोज नौ लाख लोगों को दवाइयां बांटी जा रही हैं। 80 हजार से ज्यादा जांचें की जा रही हैं। भोजन भी दिया जा रहा है। ऐसे में सेवा की गुणवत्ता का आकलन जरूरी है। हर माह कलेक्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में इसकी समीक्षा होगी।
असफल हो चुका है प्रयोग
यह पहला मौका नहीं है, जब विभाग इस तरह का प्रयोग करने जा रहा है। 2008 में भी हर अस्पताल में शिकायत पेटी रखवाई थी। तब भी लाखों फीडबैक फॉर्म छपवाए गए थे, लेकिन वे रद्दी में पड़े रहे। अधिकारी भी मानते हैं प्रयोग असफल रहा था।