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आईडीए की स्कीम 134 के रो-हाउस में मालिकों ने कर लिए अवैध निर्माण

8 वर्ष पहले
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इंदौर. एमआर-10 पर इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम 134 में बने रो-हाउसेस पर बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हो गया है। कुल 116 रो-हाउस में से 44 अब तक नहीं बिके हैं। इनमें से अधिकांश आरक्षित श्रेणी के हैं। जिन लोगों ने इन्हें खरीदा है, उनमें से कई ने रो-हाउस के आगे और पीछे अवैध निर्माण कर लिया है।

134 प्राधिकरण की महत्वपूर्ण स्कीम है। यहां प्लॉट के दाम 3 से साढ़े 4 हजार रुपए वर्गफीट तक हैं। हालांकि जेएनएनयूआरएम (जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन) के तहत बने ये रो-हाउस साल 2008 से विवादों में हैं। लागत बढऩे के बाद प्राधिकरण ने इनके बदले दूसरे रो-हाउस बिना लाभ-हानि के देने का निर्णय लिया। बदले में दूसरी स्कीम में इतने ही आवास बनाने की अनुमति शासन से मांगी।

शासन स्तर पर इसकी अनुमति मिलने में लंबा समय लगा। इसके बाद आईडीए ने इनके आवंटन की कार्रवाई शुरू की। अवैध निर्माण को लेकर संपदा शाखा का कहना है जो जमीन खाली छोड़ी गई है, यह समान रूप से सभी के लिए है। भवन मालिक यदि चाहें तो ऊपर निर्माण कर सकते हैं। आगे-पीछे निर्माण गलत है। संबंधित अधिकारी इस संबंध में अधिक जानकारी दे पाएंगे।

जिम्मेदार अधिकारी का जवाब

नहीं देखा अवैध निर्माण

आगे और पीछे बाउंड्रीवॉल या कम्पाउंडवॉल बना सकते हैं। अभी मैंने अवैध निर्माण नहीं देखा है। कक्ष बनाने या अवैध निर्माण की अनुमति नहीं है। संयुक्तिकरण की अनुमति भी आईडीए ने नहीं दी है। सभी रो-हाउस की निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद आगे कार्रवाई होगी।

- राजेंद्र शर्मा, स्कीम प्रभारी और कार्यपालन यंत्री, आईडीए


500 एकड़ में प्रस्तावित स्कीम 175 के लिए भी जमीनों के करार शुरू

आईडीए ने स्कीम 175 (खजराना के पीछे बायपास के दोनों ओर लगी हुई) के जमीन अधिग्रहण के लिए जमीन मालिकों से करार शुरू कर दिया है। स्कीम 174 के बाद 175 के लिए प्राधिकरण ने यह कवायद डेढ़ साल बाद शुरू की है। 500 एकड़ में प्रस्तावित यह स्कीम प्राधिकरण की सबसे बड़ी आवासीय योजना है।

प्राधिकरण सीईओ दीपक सिंह के मुताबिक स्कीम में ग्राम निपानिया, टिगरिया राव, कनाडिय़ा, बिचौली हप्सी की जमीनें शामिल हंै। इन्हीं के लिए २१ जनवरी से 21 फरवरी तक करार किए जाएंगे। १ अगस्त २०13 को आईडीए ने इसका संकल्प पारित किया था। इसमें भी प्राधिकरण स्कीम 174 की तरह किसान व जमीन मालिकों को 50 प्रतिशत क्षेत्रफल के बराबर के प्लॉट विकसित करके देगा। हालांकि इस स्कीम में किसानों का विरोध सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अधिकांश जमीनों के नक्शे टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से पास हो चुके हैं।


ये करना होगा जमीन मालिक/किसानों को
एक हजार रु. के दो नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प दो प्रतियों में अनुबंध करने के लिए लाने होंगे।
ये स्टाम्प जमीन मालिक और प्राधिकारी के संयुक्त नाम से लिए जाएंगे।
जमीन मालिक को अपने दो फोटो, चालू वर्ष का खसरा, बी-1, पटवारी का हाथ से ट्रेस नक्शा और ऋण पुस्तिका लाना होगी।
जमीन मालिक को प्राधिकरण कार्यालय के कक्ष क्रं. 202 में पूरी जानकारी मिल सकती है।