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आईआईएम चेयरमैन और डायरेक्टर को हाईकोर्ट नोटिस, मांगा जवाब

8 वर्ष पहले
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इंदौर। आईआईएम के चार प्रोफेसरों की याचिका पर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आठ पक्षकारों को शोकॉज नोटिस जारी करने का फैसला किया है। इनमें सचिव उच्च शिक्षा केंद्र सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, मंत्रालय के अतिरिक्त व संयुक्त सचिव, आईआईएम इंदौर के बोर्ड चेयरमैन के.वी. कामथ, पूर्व चेयरमैन एल. एन. झुनझुनवाला, डायरेक्टर एन. रविचंद्रन, आईआईएम इंदौर शामिल हैं।
याचिका में वित्तीय अनियमितता, भर्ती में अनियमितता और फैकल्टी से दुव्र्यवहार जैसै अरोप लगाए गए हैं। इन पर पक्षकारों से जवाब मांगा गया है। नोटिस एक सप्ताह में जारी हो जाएंगे और संभवत: जून के अंत में अगली सुनवाई होगी। याचिका प्रो. पी.के. सिंह, डॉ. डी. एल. सुंदर, डॉ. केयूर ठाकेर व डॉ. एस. डे ने लगाई थी।
सुनवाई में ये सवाल उठाए
बुधवार को इस मामले में सुनवाई हुई थी, जिसमें फैसला सुरक्षित रखा गया था। सुनवाई के दौरान प्रोफेसरों की ओर से तर्क रखे गए कि 28 मई २०12 को हाई कोर्ट ने सात प्रोफेसरों की याचिका पर जांच के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को कहा था, लेकिन मंत्रालय ने मामला बोर्ड को सौंप दिया। बोर्ड द्वारा गठित जांच कमेटी में तीन सदस्य तो बोर्ड के ही थे।
जांच कमेटी की रिपोर्ट को मंत्रालय ने वैसे ही स्वीकार कर लिया। उसमें अपनी ओर से परीक्षण नहीं किया गया। रिपोर्ट को सेंट्रल विजिलेंस कमीशन को दिखाना चाहिए था, वह भी नहीं किया। प्रोफेसरों की ओर से वकील विवेक दलाल ने पक्ष रखा। उधर, महिला प्रोफेसर द्वारा यौन शोषण के खिलाफ लगाई गई याचिका पर सुनवाई नहीं हुई।