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डाउनलोड करेंइंदौर। साथी प्रोफेसर द्वारा यौन शोषण और डायरेक्टर द्वारा बिना नोटिस दिए ही संस्थान से बर्खास्त करने को लेकर आईआईएम की महिला प्रोफेसर द्वारा दायर याचिका की सोमवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने आईआईएम बोर्ड चेयरमैन के.वी. कामथ, डायरेक्टर एन. रविचंद्रन, आरोपी प्रोफेसर जयसिम्हा के.आर आईआईएम को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा।
कोर्ट ने महिला प्रोफेसर से एक महीने में क्वार्टर खाली कराने के डायरेक्टर के आदेश पर भी रोक लगा दी। सुनवाई में महिला प्रोफेसर की ओर से पक्ष रखा गया कि डायरेक्टर तानाशाहीपूर्वक व्यवहार कर रहे हैं।
जेंडर सेन्सिटिविटी कमेटी द्वारा यौन शोषण की शिकायत में जब आरोपी प्रोफेसर को क्लीन चिट दे दी गई, तो डायरेक्टर ने तत्काल रविवार के दिन ही आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को संस्थान से बाहर कर दिया। जबकि उनका एक साल का प्रोबेशन पीरियड जून 13 में पूरा हो रहा था। महिला प्रोफेसर की ओर से वकील विवेक दलाल ने पैरवी की। चेयरमैन व डायरेक्टर की ओर से वरिष्ठ वकील ए.के. चितले, प्रोफेसर जयसिम्हा की ओर से वकील विजयेश अत्रे व संस्थान की ओर से वकील एस.एच. मोयल ने पक्ष रखा।
याचिका में ये आरोप लगाए
महिला प्रोफेसर ने याचिका में आरोप लगाए हैं कि प्रोफेसर जयसिम्हा ने गोवा व बैंकाक टूर के दौरान यौन शोषण किया।जब इसकी शिकायत डायरेक्टर को की तो उन्होंने जयसिम्हा को अपना करीबी बताते हुए बचाव किया। बाद में जेंडर सेन्सिटिविटी कमेटी ने सुनवाई कर आरोपी प्रोफेसर को क्लीन चिट दे दी। इस रिपोर्ट के आते ही डायरेक्टर ने छुट्टी के दिन रविवार को बर्खास्त करने और ऑफिस व क्वार्टर खाली करने का आदेश दे दिया। बोर्ड चेयरमैन को मामले की जानकारी दी लेकिन उन्होंने कड़ा कदम नहीं उठाया।
चार प्रोफेसरों के मामले में भी जारी हुआ है नोटिस
चार प्रोफेसरों द्वारा डायरेक्टर पर लगाए गए आरोपों की सही जांच नहीं होने व फिर से जांच कराने को लेकर दायर याचिका पर भी 9 मई को हाई कोर्ट ने चेयरमैन, डायरेक्टर, पूर्व चेयरमैन, मानव संसाधन विकास मंत्रालय सहित आठ पक्षकारों को नोटिस जारी किया था।
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