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  • Indore 55% Of Patients Admitted To The Swine Flu Death

इंदौर में भर्ती स्वाइन फ्लू के मरीजों में से 55% की मौत, अब तक 28 की मौत

6 वर्ष पहले
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इंदौर. स्वाइन फ्लू से लगातार मौतें हो रही है और अफसर मौत के आंकड़ों में ही उलझे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जहां कोर्ट में मौत के अधूरे आंकड़े पेश किए तो एमवाय में कितने मरीजों का इलाज हो चुका है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। यह जानकारी भी सामने आई है कि इंदौर में दूसरे शहरों की तुलना में स्वाइन फ्लू के मरीजों की मौत की दर ज्यादा है।
यहां इलाज करा चुके या करा रहे जितने मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई हैं उनमें से 55 फीसदी की मौत हो चुकी है। एमवाय में वार्ड 26 और तल मंजिल पर बने वार्ड में मरीजों को रखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अब तक 71 मरीज भर्ती हुए हैं इनमें से 68 सी-कैटेगरी के है। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ. शरद पंडित का कहना है कि इंदौर में क्रिटिकल मरीज रैफर हो कर आ रहे हैं। सेंपल भी सिलेक्टिव भेजे रहे हैं। इसी वजह से यहां मौत का आंकड़ा ज्यादा है।

बच्चों को बताएं लक्षण
शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक ने सभी स्कूलों के प्राचार्यों को बुलाकर निर्देश दिए कि बच्चों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बारे में समझाएं। किसी बच्चे को सर्दी-जुकाम और बुखार आए तो तुरंत माता-पिता को सूचित कर स्क्रीनिंग सेंटर पर जाने के लिए कहे। उधर, राऊ विधायक जीतू पटवारी ने स्वाइन फ्लू को लेकर सीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा स्वास्थ्य विभाग सचेत नहीं है।
सभी के आंकड़े अलग-अलग
सरकार ने संभाग के सभी जिलों से स्वाइन फ्लू की जानकारी एकत्र करने की जिम्मेदारी एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन को दी है। गुरुवार को कॉलेज प्रशासन ने कुल 19 मौत की ही पुष्टि की। वहीं सीएमएचओ ने 23 मौत की बात मानी। दूसरी ओर जेडी कार्यालय ने 28 मौत होने की जानकारी दी। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एमके राठौर का कहना है कि हमारे पास स्वास्थ्य से रोजाना रिपोर्ट नहीं आ रही है। इस वजह से अंतर हो सकता है, वहीं जेडी डॉ. पंडित ने कहा हम तो जानकारी भेज रहे हैं। दूसरी और सीएमएचओ ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया।
टेमीफ्लू के लिए होता रहा इंतजार
सरकारी हो या प्राइवेट अस्पताल, टेमीफ्लू के लिए अभी भी लोग परेशान हो रहे हैं। गुरुवार को एक निजी अस्पताल का कर्मचारी टेमीफ्लू के लिए सिविल सर्जन स्टोर पहुंचा। वहां कर्मचारी ने दवा देने से यह कहते हुए इनकार किया कि पहले किसी स्वास्थ्य अधिकारी से साइन करवा कर लाओ। वह सीएमएचओ डॉ. महेश मालवीय के कार्यालय पहुंचा तो बताया गया कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गए हैं। इसके बाद आईडीएसपी प्रभारी डॉ. जी.एल. सोढ़ी को फोन लगाया लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं हुए। एक घंटा बीत गया तब कर्मचारी जेडी कार्यालय पहुंचा लेकिन जेडी डॉ. शरद पंडित भी नहीं मिले। मजबूरन प्राइवेट अस्पताल से आया कर्मचारी बाहर ही बैठ गया। करीब साढ़े तीन बजे डॉ. पंडित लौटे तब उसे दवा व कीट मिल पाए।