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सपने होंगे पूरे, उद्योगों की ट्रेन को वेटिंग लिस्ट से निकलकर मिली हरी झंडी

8 वर्ष पहले
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इंदौर। एकेवीएन ने पांच महीने मशक्कत कर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की एक-एक फाइल खंगालकर 80 करोड़ कीमत की करीब 123 एकड़ खाली जमीन खोज निकाली है। यह इतनी जमीन है कि सालों से जमीन मिलने की आस लगाए वेटिंग लिस्ट में उलझे सभी उद्योगपतियों की मुराद पूरी हो जाएगी। इससे करीब 145 नए उद्योग लगने का रास्ता साफ हो गया है। रोचक बात यह है कि इस जमीन से मिलने वाले रुपयों से नर्मदा-पीथमपुर वाटर प्रोजेक्ट के लिए जापान से लिया जाने वाला लोन महज बैंक ब्याज से ही चुकता हो जाएगा।

ऐसे ढूंढी मालामाल बनाने वाली जमीनें

कई सालों से यह परंपरा बन गई थी कोई भी उद्योगपति यदि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में यूनिट लगाने की आस लिए एकेवीएन में जाता तो उसे जमीन आवंटन की लंबी प्रतीक्षा सूची दिखाकर चलता कर दिया जाता था। न तो इससे पहले अधिकारियों ने प्रतीक्षा सूची क्लियर करने की सोची और न ही मौके की वास्तविक स्थिति पता लगाई। पांच माह पहले सर्वेयर और इंजीनियर की टीम बनाई गई। उन्हें पूरे पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का चप्पा-चप्पा जांचकर खाली प्लॉट या बंद पड़ी यूनिट्स की रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया। दूसरी टीम ऐसी यूनिट्स की फाइलों को खंगालने में लगाई गई जिनके आवंटन निरस्त हो गए थे। दोनों ही टीमों की जब रिपोर्ट तैयार हुई तो जानकारी चौंकाने वाली थी। करीब 123 एकड़ जमीन सालों से यूं ही पड़ी थी और प्रतीक्षा सूची धूल खा रही थी।

फिर क्या किया

जमीन ढूंढने के बाद आवंटन में परेशानी न हो इसलिए करीब सात अलग-अलग लेआउट बनाकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को स्वीकृति के लिए भेजे गए। हाल ही में ये लेआउट पास हुए हैं। अब आवंटन के लिए जमीन पूरी तरह तैयार है।

ये फायदा होगा उद्योगपतियों को :

सालों से करीब 145 उद्योग सिर्फ इसलिए नहीं लग पा रहे थे क्योंकि जमीन नहीं मिल रही थी। अब मौजूदा वेटिंग लिस्ट तो क्लियर होगी ही भविष्य में मांग पर जमीन उपलब्ध हो जाएगी। उद्योगपतियों को विकसित प्लॉट मिलेंगे जिससे उद्योग तुरंत स्थापित किया जा सकेगा। टीएंडसीपी से नक्शा पास है इसलिए विवाद की भी कोई स्थिति नहीं रहेगी।

एकेवीएन को :

260 करोड़ के ड्रीम प्रोजेक्ट नर्मदा पीथमपुर जल परियोजना में सर्वाधिक जरूरत पैसों की थी। 150 रुपए वर्गफीट (उद्योगों को जमीन देने के लिए शासन द्वारा तय दर) में जमीन आवंटित करने से एकेवीएन को एकसाथ करीब 80 करोड़ रुपए की कमाई होगी। इससे जो ब्याज आएगा उससे ही डीएमआईसी के तहत जापान से 150 करोड़ का जो सॉफ्ट लोन लंबे समय के लिए लिया जा रहा है, उसे चुकाया जाएगा। खाली जमीनों पर जो कब्जे हो रहे थे, उससे भी एकेवीएन पार पाएगा।

सालों बाद शुरू हो रही प्रक्रिया

॥यह तथ्य हमें भी चौंका रहा है कि जिसके लिए उद्योग वर्षों से वेटिंग लिस्ट में थे वह जमीन मौके पर मौजूद थी। एकेवीएन की टीम ने अच्छा काम करते हुए जमीन खोज निकाली है इससे एक बार में पूरी वेटिंग लिस्ट क्लियर हो जाएगी। साथ ही एकेवीएन का खजाना भी भर जाएगा।
मनीष सिंह
एमडी, एकेवीएन इंदौर

पहले चरण में 30 उद्योगों की जमीन

खाली प्लॉटों की पूरी सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई है। 1 से 30 तक वेटिंग वाले उद्योगपतियों को पत्र लिखकर प्लॉट लेने बुलाया गया है। 15 से 17 मई तक जमीन आवंटित कर दी जाएगी। इसके बाद 31 से 145 नंबर वाले उद्योगपतियों को एकसाथ बुलाया जाएगा। वेटिंग में ऊपर शामिल उद्योगपतियों को अपनी पसंद का प्लॉट चुनने की आजादी रहेगी। अधिकतर प्लॉट 10 हजार से लेकर 20 हजार वर्गफीट के हैं।