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सुझावों में जो संभव होगा, करेंगे : आयुक्त

9 वर्ष पहले
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इंदौर.हाई कोर्ट के आदेश के बाद बीआरटीएस पर बुधवार को भी जनसुनवाई हुई। इसमें मंगलवार के 12 आपत्तिकर्ताओं के साथ अन्य आपत्तिकर्ताओं को भी सुना गया। प्रेजेंटेशन के जरिए आपत्तिकर्ताओं को प्रोजेक्ट की वस्तुस्थिति और संचालन की जानकारी दी गई।
सुनवाई में पिछले पांच सालों से बीआरटीएस बनते देख रहे लोगों ने जमकर गुस्सा निकाला। इस बीच जहां अफसर सिस्टम समझाने की कोशिश करते रहे, वहीं जनता खुद को होनी वाली व्यवहारिक दिक्कतें बताती रही। सुनवाई के दौरान ही ऐसी स्थिति बन गई कि संभागायुक्त प्रभात पाराशर ने अंत में कहा आपके सुझावों में से जो संभव होगा करेंगे।
बैठक में 12 आपत्तिकर्ताओं के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी व आमजन भी मौजूद थे। इन्हीं 12 लोगों की सुनवाई गुरुवार को भी होगी। नए आपत्तिकर्ता भी लिखित आपत्ति दे सकते हैं। सुनवाई प्रीतमलाल दुआ सभागृह में होगी। बुधवार को सुनवाई कुछ इस तरह चली-
स्थान : प्रीतमलाल दुआ सभागृह, शाम- 4.30 बजे
बीआरटीएस के ऑपरेशन में शामिल एआईसीटीएसएल कंपनी की ओर से संस्था एमबार्क के प्रतिनिधि प्रशांत ने प्रजेंटेशन शुरू किया। प्रारंभिक आंकड़ों के साथ बीआरटीएस बनने के पहले और बाद के चित्रों के साथ बदलाव बताए गए।
ञ्चएक व्यक्ति ने आपत्ति ली- सिटी बस पहले साल ही अच्छी थी, ढर्रा बिगड़ गया है।
ञ्चप्रशांत- हां, कुछ हद तक आपका कहना सही है। हमें भी शिकायतें मिलती है, बावजूद सिस्टम अच्छा है। यदि इसे पूरे शहर में लागू किया जाए तो कार्बन डाई आक्साइड कम हो सकता है।
प्रमोद टंडन- पूरी कहानी मत सुनाओ। और क्या बचा है, वह बताओ, ताकि जनता को बोलने का मौका मिले।
कोडवानी- हम समझ लें फिर बोलेंगे।
प्रशांत- 60 लाख की एसी बस आएगी। दोनों ओर डोर रहेंगे। रेल की तरह सीधे बस में आ-जा सकेंगे। बटन दबाएंगे तो ट्रैफिक रुक जाएगा, फिर बस स्टेशन पर जा सकेंगे।
रवि गुरनानी- क्या एक बटन दबाने से दूसरे वाहन रुकेंगे?
महिला श्रोता- बीच की लेन में इतना ट्रैफिक रहता है कि वो वाहन रुकेंगे नहीं और दुर्घटनाएं होंगी।
नोडल अधिकारी विवेक श्रोत्रिय- पहले बताने तो दीजिए।
प्रशांत- 13 जगह यू-टर्न रहेगा।
विवेक मिश्रा (आमजन)- साढ़े ग्यारह किमी में 21 जगह बस रोकेंगे.. फिर फास्ट कैसे हुआ?
प्रशांत- पहले गति 14 किमी/घंटा थी जो कॉरिडोर बनने के बाद 22 किमी हो जाएगी।
पार्षद दिलीप कौशल- चाहे जहां से तो रोड बंद कर दिए, हर आदमी बस से ही चलता है क्या यहां?
प्रशांत- आप प्रजेंटेशन देख लीजिए (ग्राफिक्स के साथ आटोमेशन का एक प्रजेंटेशन दिखाया, जिसमें सिर्फ बस और कुछ कार सड़क पर चलती नजर आई)
विवेक मिश्रा- जितनी कारें प्रजेंटेशन में बताई, उससे 25 गुना अभी चलती है।
एक अन्य- मैं मूसाखेड़ी में रहता हूं। जीपीओ तक आऊंगा, फिर निरंजनपुर के लिए बस में बैठूंगा। अपनी गाड़ी कहां रखूंगा, एक भी जगह पार्किग नहीं बनाई।
संभागायुक्त- मैं स्पष्ट कर दूं कि यह पूरी प्रक्रिया माननीय कोर्ट के आदेश पर हो रही है। हमने आपत्ति-सुझाव बुलाए। कुल 12 लोगों ने दिए। हमने कहा याचिकाकर्ता के साथ आम लोग भी इस सिस्टम को समझें। जिन्होंने इसे शुरू किया, उस पर बात करने से मतलब नहीं है। हमें भी समझ में आता है कि जो प्रेजेंटेशन में अभी दिखाया गया उससे लगता है कि कोई यूरोप का शहर हो। यहां दो पक्षों का विवाद नहीं है। कोर्ट आदेश का सकारात्मक पालन है। आपके सुझावों से जो संभव होगा, हम करेंगे। अंत में बोले- मुझे लगता है बैठक समाप्त कर देनी चाहिए..।