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रिश्तों की डोर हुई मजबूत: अपने बच्चों का दर्द नहीं देखा गया माता-पिता से

8 वर्ष पहले
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इंदौर. 16 साल तक मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को जतन से पाला। जब पता चला कि बेटे की दोनों किडनी खराब है और बचाया नहीं जा सकता तो मां से रहा नहीं गया। मां ने अपनी किडनी देकर बेटे को दोबारा जन्म दिया। यही दर्द एक पिता का भी है। 21 साल की बेटी की दोनों किडनी खराब हो गई। रिक्शा चलाने वाले पिता ने भी बेटी को किडनी देकर रिश्तों की डोर और मजबूत कर दी।

पहला वाकया है 16 साल के आयुष गुप्ता का। उसकी दोनों किडनी खराब थी। मां भारती की किडनी अब आयुष को ट्रांसप्लांट कर दी गई है। दूसरा केस 21 साल की रुखसार का है। डॉक्टरों ने पिता मो. इशहाक अंसारी की किडनी बेटी को ट्रांसप्लांट कर दी है। डॉक्टरों के अनुसार यदि जल्द ही दोनों मरीजों का ऑपरेशन नहीं होता, तो उनके पास सालभर से ज्यादा का वक्त नहीं रहेगा। एक निजी अस्पताल में दोनों की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। ऑपरेशन में डॉ.ओपी राठी और डॉ. विवेक झा की अहम भूमिका रही।

भावनाएं भी साथ जुड़ी थीं, बेहद सफल रहे ऑपरेशन

यह दोनों केस अपने आप में अलग थे। इसलिए हमारी भी भावनाएं जुड़ी थीं। किडनी ट्रांसप्लांट बेहद सफल रहा। आयुष और रुखसार पूरी तरह ठीक हैं। वहीं आयुष की मां भारती और रूखसार के पिता इशहाक की सेहत भी ठीक है। -डॉ. ओपी राठी, किडनी रोग एवं ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ

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