इंदौर. बीआरटीएस को लेकर बुधवार को प्रदेश के नगरीय प्रशासन व आवास, पर्यावरण विकास मंत्री कैलाश जयवर्गीय खुली चर्चा करेंगे। रवींद्र नाट्यगृह में दोपहर डेढ़ से शाम चार बजे तक आमजन सुझाव दे सकते हैं। आयोजन का नाम है स्वर्णिम मप्र विषय पर परिचर्चा।
फिलहाल कॉरिडोर का मामला कोर्ट में है। कोर्ट के निर्देश पर पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी सुझाव दे चुकी है। 15 दिन बाद उसमें सुनवाई होना है। अब मंत्री की खुली चर्चा से लोगों को नई आस बंधी है। खासकर उन्हें, जो नौलखा, पलासिया से एलआईजी के बीच से गुजरते हैं।
जीपीओ, शिवाजी प्रतिमा चौराहे पर रैलिंग में फंसने के अलावा परेशानी उस पैदल यात्री की भी है, जो कॉरिडोर के लोक परिवहन का उपयोग करता है। 'भास्कर' ने कॉरिडोर की इन व्यावहारिक दिक्कतों को जाना। एक्सपर्ट से चर्चा में सामने आया कि मूल परेशानी एलआईजी से नौलखा के बीच है, विशेषकर चौराहों पर।
रैलिंग की डिजाइन पर बात हो
मुसीबत रैलिंग से है। कोर्ट के निर्देश पर बनी कमेटी इसे खतरनाक बता चुकी है। 'भास्कर' के एक्सपर्ट का कहना है कि रैलिंग की डिजाइन और एरिया पर बात हो। एलआईजी से पलासिया तक तो पूरा ट्रैफिक मिक्स कर देना चाहिए। नौलखा तक की परेशानी सबसे पहले दूर करें। अहमदाबाद में यह प्रयोग सफल रहा है।
चौराहे सुधारें
बीआरटीएस के समानांतर अभी सिर्फ पूर्वी रिंग रोड है। सपना-संगीता से आना वाला ट्रैफिक छावनी में फंसता है, इसलिए वाहन बीआरटीएस पर आते हैं। यही स्थिति जंजीरावाला चौराहे से नेहरू नगर और मालवा मिल से पाटनीपुरा जाने वाली रोड पर है, इसलिए चौराहें सुधारें।
फ्लायओवर जरूरी
बॉटलनेक वाले हिस्से में फुट ओवरब्रिज बनें। बीआरटीएस के हर चौराहे पर लिंक रोड के लिए लोक परिवहन के छोटे वाहन होने चाहिए।