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रेंजर, चौकीदार के सामने से सरपट गुजर गया बाघ

8 वर्ष पहले
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इंदौर. बुधवार सुबह 8.35 का वक्त था। देवास वन मंडल की उदय नगर रेंज के रेंजर एके श्रीवास्व और दो कर्मचारी जानवरों की गणना कर रहे थे। सूखे पत्तों पर उनके कदम पड़े तो शांत जंगल में तेज आवाज आई। करीब 50 मीटर दूर से चार फीट लंबा बाघ सरपट दौड़ता हुआ निकला। रेंजर और चौकीदार पसीना-पसीना हो गए। मोबाइल निकालकर फोटो लेने की कोशिश की, तब तक बाघ नदारद हो गया।

कहीं से पलटकर वह हमला न कर दे, इसलिए टीम जंगल से बाहर आ गई। रेंजर ने अफसरों को खबर दी। मुख्य वन संरक्षक डॉ. पीसी दुबे के मुताबिक 50 से ज्यादा वनकर्मियों की टीम जंगल भेजी गई। वीडियो कैमरा भी दिया गया है। जलस्रोत के समीप भी रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि फुटेज मिल सकें। इंदौर-उज्जैन संभाग के जंगलों में जानवरों की गणना के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। यहां अब तक 40 से ज्यादा तेंदुए होने के प्रमाण मिले हैं।


यहां इनकी मौजूदगी का पता चला

इंदौर तेंदुए 6, जंगली सूअर 50, लकड़बग्घा 20, लोमड़ी 50, हिरण 24
झाबुआ नीलगाय 100, लकड़बग्घा 25, लोमड़ी 20
देवास बाघ 2, तेंदुए 27, भालू 1, लकड़बग्घा 58, सियार 21, लोमड़ी 82
रतलाम तेंदुए 2, लकड़बग्घा 10, सियार 70, भेडिय़ा 1, लोमड़ी 7
नीमच लकड़बग्घा 9, सियार 43
उज्जैन लकड़बग्घा 3, सियार 25, भेडिय़ा, 1, लोमड़ी 2
शाजापुर लकड़बग्घा 2, सियार 12
मंदसौर लकड़बग्घा 45, सियार 149, तेंदुए 10, भालू 12, भेडि़ए 10, लोमड़ी 38

जानवरों की गणना में मिले अच्छे परिणाम , इंदौर-उज्जैन संभाग के जंगलों में 40 से ज्यादा तेंदुए

इंदौर संभाग के धार और झाबुआ में नीलगाय की संख्या काफी बढ़ गई है। संख्या इतनी हो गई है कि ये फसलें चौपट कर रही हैं। धार जिले में एक दर्जन से अधिक तेंदुए होने की बात भी सामने आई है। सिंदौड़ा, उमरबन में दो तेंदुए हाल ही में बस्ती में घुसे थे।

ऐसे करते हैं गणना

डीएफओ अशोक कुमार जोशी के मुताबिक जंगलों में गणना के लिए स्थान चुन लिए जाते हैं। पगडंडी पर एक दिन पहले चूने की लाइन डाली जाती है। इस चिह्नित जगह पर एक से दो दिन नजर रखी जाती है। इस जगह जितने पैरों के चिह्न मिलते हैं, उन्हें गिना जाता है। पूरे जंगल से इस तरह से आंकड़े इकट्ठे होते हैं।
: जंगल में जानवरों का मल-मूत्र भी इकट्ठा किया जाता है। इसके आधार पर भी पहचान होती है।
: पेड़ों पर जानवरों की रगड़ देखकर भी पहचान की जाती है। चमड़ी, बाल लेकर संख्या पता चलती है।
: जंगलों में मृत अवस्था में मिले जानवरों को देखकर भी पता चलता है कि वहां हिंसक जानवर हैं या नहीं?
: जंगल के आसपास रहने वाले लोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकारी-कर्मचारियों को यही लोग ऐसे स्थानों पर ले जाते हैं जहां बाघ, तेंदुए, भालू, भेडि़ए होने की संभावना ज्यादा रहती है।