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90 हजार वर्गफीट का मैरिज गार्डन, रिकॉर्ड में 10 हजार वर्गफीट ही दर्ज

7 वर्ष पहले
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इंदौर. नगर निगम को बड़े संपत्तिकर दाताओं की जांच में लगातार गड़बड़ी मिल रही है। निगम रिकॉर्ड में सेल्फ असेसमेंट के नाम पर जो एरिया बताया गया, मौके पर उससे कई गुना ज्यादा प्रॉपर्टी मिल रही। निगम का अनुमान है अब तक 30 से ज्यादा संपत्ति की जांच में 3 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी मिल चुकी है। रविवार को भी खजराना क्षेत्र के एक मैरिज गार्डन में ऐसी गड़बड़ी पकड़ाई जहां 80 हजार वर्गफीट का टैक्स जमा नहीं किया जा रहा था।
निगम अपर आयुक्त देवेंद्रसिंह ने बताया नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देश पर इस मैरिज गार्डन की जांच की। गुरबक्ष साहनी के नाम से बने इस गार्डन का निगम अकाउंट में मात्र 10 हजार वर्गफीट एरिया दर्ज था जबकि मौके पर यह 90 हजार वर्गफीट निकला। यानी 80 हजार वर्गफीट का विशुद्ध अंतर मिला। अब खाते में संशोधन कर नए रिकॉर्ड के हिसाब से और पास हुए नक्शे व रजिस्ट्री के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स वसूला जाएगा।
जलकर जमा करने के अंतिम दो दिन
निगम द्वारा वर्षों से जल कर नहीं जमा करने वालों को दी गई छूट 30 सितंबर को खत्म हो जाएगी। इसके तहत अप्रैल 2012 से अब तक का ही टैक्स जमा करना होगा, भले ही 10 साल का टैक्स बकाया हो। इसके बाद जिनका भी जल कर बकाया होगा उनका नल कनेक्शन काट दिया जाएगा।