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एमजीएम मेडिकल कॉलेज: जूनियर के अभिभावक बोले- सीनियर्स पर भी हो कार्रवाई

7 वर्ष पहले
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इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में अश्लील पोस्टर लगाने के आरोप में निलंबित छात्रों के माता-पिता इस मामले की जांच के लिए गठित समिति के सामने सोमवार को उपस्थित हुए। माता-पिता ने कहा-बच्चों से गलती हो गई, इसके लिए मांगी मांगते हैं। दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी लेकिन बच्चों ने जिन सीनियर्स के कहने पर ऐसा किया, उन पर तो कार्रवाई करें।
यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार रैंगिंग के मामले में 24 घंटे के अंदर प्रारंभिक जांच कर पुलिस को मामला सौंपना जरूरी है, लेकिन चार दिन बाद भी कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि एंटी रैंगिंग समिति की रिपोर्ट सात दिन में मांगी है, इसके बाद कोई कार्रवाई करेंगे।
मामले की जानकारी मिलने के बाद संयोगितागंज पुलिस ने शुभनारायण घनघोरिया, सूरज अहिरवार, अंशुमन दत्ता और योगेश परिहार को तीन दिन पूर्व हिरासत में लिया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने उन्हें सात दिन के लिए निलंबित कर दिया था।
इन चारों के माता-पिता को टेलीफोन पर सूचना देकर बुलवाया गया। वार्डन डॉ. संजय दादू, प्रभारी डीन डॉ. उल्का श्रीवास्तव और कमेटी के अन्य सदस्यों ने उनसे बात की। साथ ही कॉलेज में हुए घटनाक्रम से भी अवगत करवाया।
ये है मामला
गुरुवार रात संयोगितागंज पुलिस ने चार छात्रों को एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में पोस्टर लगाते हुए पकड़ा था। इसके बाद उन्हें छोड़ भी दिया गया। इन पोस्टरों पर अश्लील तस्वीरों के साथ कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्राओं के नाम लिखे थे।
पोस्टर लगाने वाले छात्रों को होस्टल छोड़कर आधी रात को कॉलेज परिसर में आने पर अनुशासन तोड़ने का दोषी माना गया है। अज्ञात सीनियर छात्रों द्वारा धमकाने की बात सामने आने के बाद मामला एंटी रैगिंग समिति को सौंपा गया है। इसी तरह महिला की विकृत छवि प्रस्तुत करने पर उत्पीड़न समिति को भी जांच के लिए कहा गया है।
विवादों में रही है यह बैच
एनोटोमी की कक्षा में ‘हैप्पी बर्थ डे टू यू...’ गाकर महिला प्रोफेसर को परेशान करने वाले छात्र भी इसी 2013 बैच के थे। कुछ महीने पहले महिला प्रोफेसर ने महिला उत्पीड़न समिति को इसकी शिकायत की थी। उस समय भी छात्रों के माता-पिता को बुलवाया गया था।
बड़ा सवाल क्यों नहीं हुई कार्रवाई

यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार न केवल कॉलेज प्रबंधन, बल्कि पुलिस भी सवालों के घेरे में है। रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस के स्पष्ट निर्देश हैं। इसके तहत रैगिंग की शिकायत या सूचना मिलने के 24 घंटे में प्रारंभिक जांच कर पुलिस को मामला सौंपना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले को प्रबंधन अब तक रैगिंग नहीं मान रहा। सवाल पुलिस पर भी है कि अगर यह रैगिंग नहीं है तो इतने गंभीर मामले पर उसने आरोपियों को रंगेहाथों पकड़ने के बाद भी कोई प्रकरण दर्ज क्यों नहीं किया है।
सीधी बात- डॉ. संजय दादू वार्डनॉ

समितियों की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे
> माता-पिता से बातचीत में क्या बात सामने आई?
- वे यही कह रहे थे कि बच्चों से गलती हो गई। सीनियरों ने ऐसा करने के लिए कहा था।
> क्या माता-पिता सीनियर छात्रों के नाम बता पाए?
- नहीं, नाम उन्हें भी नहीं बताए गए।
> क्या एक साल पुरानी बैच को सीनियर के नाम नहीं पता होंगे?
- ऐसा संभव तो नहीं है।
> फिर नाम नहीं बताने की क्या वजह?
- एंटी रैगिंग समिति और महिला उत्पीड़न समिति को सात दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई तय करेंगे।