इंदौर. मोहल्ला समिति गठन के मामले में शासन ने जो टाइम बाउंड प्लानिंग कोर्ट में पेश की है, उस पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कई प्रश्न खड़े हो गए। एक तरफ तो शासन ने 15 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच गठन प्रक्रिया और समिति अस्तित्व में लाने का प्लान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ एक्ट में संशोधन तथा अन्य राज्यों में समिति के प्रारूप का अध्ययन करने की बात कही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब टाइम बाउंड प्रोग्राम जारी कर दिया है, समिति गठित हो जाएगी तब एक्ट में संशोधन कैसे होगा। हालांकि कोर्ट ने टाइम बाउंड प्रोग्राम पर संतुष्टि भी जाहिर की।
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव एसके मिश्रा खुद टाइम बाउंड प्लानिंग लेकर हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई दोपहर साढे तीन बजे से शुरू हुई, लेकिन मिश्रा के साथ निगमायुक्त राकेश सिंह व तमाम निगम अफसर दोपहर एक बजे से ही कोर्ट पहुंच गए थे। जस्टिस
पीके जायसवाल, जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की डिविजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। नगर निगम की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुटुम्बले, आनंद अग्रवाल ने पैरवी की। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि कमेटी गठन के लिए व्यावहारिक परेशानी, नियम, प्रक्रियाओं में संशोधन 15 दिसंबर से पहले कर लिए जाएं। यह सब होने के बाद कोर्ट को जानकारी दी जाए। उल्लेखनीय है कि शासन ने 15 जनवरी से गठन प्रक्रिया शुरू करने का कार्यक्रम शुरू किया है। अप्रैल से कमेटियां काम शुरू कर देंगी।
21 साल पहले हुआ था फैसला
मोहल्ला समिति गठन का नोटिफिकेशन 21 साल पहले केंद्र सरकार ने 1993 में किया था। राज्य सरकार ने वर्ष 2000 में गठन के अध्यादेश जारी किए थे। तब से अब तक इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया। 21 महीने पहले कमेटी गठन के लिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई तो कोर्ट ने शासन, निगम को टाइम बाउंड प्रोग्राम बनाकर कमेटी बनाने के निर्देश दिए।