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सिर्फ लोटे का गंगाजल, हिमालय की माटी ही भारत नहीं : भागवत

6 वर्ष पहले
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महेश्वर (खरगोन). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने महेश्वर के मां नर्मदा हिंदू संगम में एक बार फिर हिंदुओं को समाज के भेद भुलाकर देश के लिए जीने की नसीहत दी। उन्होंने कहा हिंदू समाज खड़ा होगा तो ही समर्थ भारत बनेगा। भागवत ने कहा मंदिर में प्रवेश नहीं, पानी अलग-अलग। क्या हो गया है।
हम वसुधैव कुटुंबकम की भावना के लोग हैं। हमारे देवी-देवता अलग-अलग हैं पर हम एक ही परमात्मा को मानते हैं। हमें देश के लिए जीना पड़ेगा। जल, जंगल, जमीन, संस्कृति के लिए लड़ना पड़ेगा। यहां संतों के आचरण का संकल्प लें। रोज एक-एक भूल में सुधार करें।

भागवत ने कहा सिर्फ लोटे का गंगाजल भारत नहीं है। हिमालय की माटी भी भारत नहीं। यहां के पशु, पक्षी, पेड़-पौधों से नाता हो वह भारत है। विदेशी आक्रामकों की शिक्षा के कारण हम टूट गए हैं। धूल के कण से लेकर सूर्य तक सब एक है। उन्होंने कहा आचरण में शुद्ध, परोपकारी, प्रेम करने वाला, सत्य व शक्ति वाला समाज चाहिए।
इसके साथ चरित्र लेकर खड़े हो जाएं। देश बड़ा होगा तो व्यक्ति भी बड़ा हो जाएगा। देश प्रतिष्ठित होगा तो हम भी प्रतिष्ठित हो जाएंगे। डॉ. भागवत ने कहा पूरा विश्व आज भारत की ओर देख रहा है। दुनिया के पास धन है, सैन्य बल भी है पर सुख-चैन नहीं। हमारे पास सबकुछ है। अमेरिका पूंजीपति है और चीन के पास सामरिक ताकत। सुखी जीवन व शांति का रास्ता हमारे पास है। विदेशी यहां आकर शांति व सुख का रास्ता ढूंढ़ रहे हैं।

डॉ. भागवत ने 40 मिनट के भाषण में हिंदू समाज को भेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। हिंदू संगम में निमाड़-मालवा के डेढ़ लाख से अधिक लोग व 100 से अधिक संत शामिल हुए।
मोहन भागवत सुबह 11.45 बजे इंदौर से महेश्वर कार से पहुंचे। नर्मदा भवन में भोजन किया और 1.15 बजे मंच पर पहुंचे। मंच से 1008 संत उत्‍तम स्‍वामी ने कहा, संत, पंथ व ग्रंथ से ही हिंदू समाज में दृढ़ता आएगी। संतों के संस्कार एकजुट करते हैं।
महाशिवरात्रि से पहले शिवरात्रि जैसा माहौल
हिंदू संगम में निमाड़-मालवा के 16 जिलों के डेढ़ लाख से अधिक धर्मरक्षक शामिल हुए। सुबह हजारों महिला-पुरुष नर्मदा स्नान के लिए पहुंचे। नर्मदा घाटों पर महाशिवरात्रि जैसा माहौल हो गया। स्नान के बाद धर्मरक्षक धर्म सम्मेलन पहुंचे।
भारत में सुख-शांति ढूंढ़ने आ रहे हैं चीन-अमेरिका
डॉ. भागवत ने कहा पूरा विश्‍व आज भारत की ओर देख रहा है। दुनिया के पास धन है, सैन्य बल भी है पर सुख-चैन नहीं। हमारे पास सबकुछ है। अमेरिका पूंजीपति है और चीन के पास सामरिक ताकत। सुखी जीवन व शांति का रास्ता हमारे पास है। विदेशी यहां आकर सुख-शांति ढूंढ़ रहे हैं।
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